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प्रतियोगिता परीक्षा एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी लाभदायक एवं उपयोगी जानकारी हिन्दी में पढ़ने के लिए और जानने के लिए कृपया www.whiteambition.com पर visit करें ।

4/27/2020

Apne Facebook Account Ko Permanently Delete Kaise Kare

4/27/2020 0
Apne Facebook Account Ko Permanently Delete Kaise Kare
Hello Facebook Users, क्या आप अपने फेसबुक ID यानि ACCOUNT को पूरी तरह से DELETE या DEACTIVATE करना चाहते हैं ? क्या आप इस सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक से अपनी किसी id, अपना कोई account permanantly बंद करना चाहते हैं ? यदि हाँ, तो इस post के द्वारा हम यह जानेंगे कि Facebook पर हम अपने किसी अकाउंट या ID  को कैसे Permanantly डिलीट या बंद अथवा DEACTIVATE  कर सकते हैं। 

फेसबुक ID  को Delete  करने के तरीके के बारे में बहुत सारे लोग गूगल पर सर्च करते  हैं। आइये देखते हैं कि लोग कैसे google search के द्वारा फेसबुक अकाउंट को बंद करने के बारे में जानना चाहते हैं। ये कुछ search queries हैं :-

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इन सर्च क़्वेरी के द्वारा आप यह आसानी से समझ सकते हैं कि बहुत सारे लोग हैं जो फेसबुक से अपनी id को बंद करने के तरीके के बारे में जानना चाह रहे हैं। यदि आप अपने फेसबुक अकाउंट को delete करना चाह रहे हैं तो आप पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आप इसे कुछ समय के लिए बंद करना चाह रहे हैं या फिर आप इसे permanantaly delete करना चाह रहे हैं।

यदि आप अपनी फेसबुक Id को कुछ समय के लिए बन्द करना चाहते हैं, तो आप आप अपनी Id को Deactivate कर सकते हैं ।

यदि आप facebook से पर्मनंटाली अपनी Id को बंद करना चाह रहे हैं और आपने यह सुनिश्चित कर लिया है तो फिर आप इस पोस्ट को step-by-step follow कीजिये और इस प्रकार आपका फेसबुक अकाउंट 30 days बाद फेसबुक से पूरी तरह हट जाएगा।

जी हाँ, यदि आप अपनी facebook ID को पूरी तौर पर बंद करना चाहते हैं तो यह एक 30 दिनों की प्रक्रिया है। आपकी ID फेसबुक से तीस दिनों बाद ही डिलीट हो पाएगी। यदि आप इस दरम्यान अपनी id  को दुबारा से चालू करना चाहते हैं तो आप ऐसा कर सकते हैं। तो आईये जानते हैं अपने फेसबुक अकाउंट को permanantaly delete या बंद या Deactivate कैसे करें।

अपने फेसबुक अकाउंट को DECTIVATE या  PERMANANTALY DELETE कैसे करें 

How to delete or deactivate facebook account/id permanantaly : Everything step-by-step in Hindi ?

STEP - 1
  • सबसे पहले आप अपने जिस फेसबुक अकाउंट को डिलीट करना चाहते हैं, उसमे लॉग इन हो जाएँ। 
STEP - 2
  • LOG IN होने के बाद दाहिने तरफ ऊपर की ओर MENU ICON पर क्लिक करें। 
STEP - 3

  • अब आपको यहाँ बहुत सारे Options नज़र आ रहे होंगे। आपको Privacy shortcuts पर क्लिक करना है। आप स्क्रीनशॉट देखें। 
STEP - 4

  • Privacy shortcuts पर क्लिक करने के बाद आपको Privacy, Account security, Ad prefrences, Your Facebook information Safety और Legal and policies नाम से headings मिलेंगे। आपको इनमे से Your Facebook information  [ योर फेसबुक इनफार्मेशन ] में Delete your account and information  पर क्लिक  करना है। 
STEP - 5 
Deactivate Your Facebook Account/ ID 

  • अब आपको Deactivate account और Delete account के दो विकल्प मिलेंगे। अगर आप अपने अकाउंट को कुछ समय के लिए बंद करना चाहते हैं यानि अस्थाई तौर पर बंद; तो आप Deactivate account को सेलेक्ट करें और Continue to Account Deactivation पर क्लिक करें। 
STEP - 6

  • अब आपको अपने अकाउंट का पासवर्ड [ Password ] टाइप करना है। Password देने के बाद Continue पर क्लिक करें।  अब आपको फेसबुक अकाउंट Deactivation से समबन्धित कारन पूछे जाएंगे। आप क्यों  अकाउंट बंद करना चाहते हैं। आप सम्बंधित कारन को CHOOSE कर लें या फिर आप [ This is temporary. I"ll be back. ] ऑप्शन को सेलेक्ट कर लें और Continue पर click करें। आप चाहें तो अपने फेसबुक अकाउंट Deactivation सम्बन्धी कारन नीचे box में टाइप कर भी बता सकते हैं। 
STEP - 7

  • अब अगले पेज पर आपको ये पूछा जाएगा कि कितने  दिनों बाद आप अपने Facebook account को Reactivate करना चाहते हैं।  आप DROPDOWN MENU से वो सेलेक्ट कर लें या फिर Dont Reactivate Automatically को सेलेक्ट कर लें और Continue पर क्लिक करें।
STEP - 8

अगले पेज पर आप यदि MESSENGER पर एक्टिव रहना चाहते हैं, तो Keep using Messenger को  check  कर दें और यदि मैसेंजर भी deactivate करना चाहते हैं तो चेक न करें। साथ में यदि आप फेसबुक नोटिफिकेशन ACCOUNT DEACTIVATE करने के बाद भी पाना चाहते हैं, तो उसे भी चेक कर दें, अन्यथा ऐसे ही छोड़ दें और CONTINUE पर क्लिक करें। अब CONTINUE पर क्लिक करें।  अब आप देखेंगे कि Account Deactivation Sucessfull हो चुका है यानि आपका Facebook Account सफलतापूर्वक Deactivate हो चुका है। 

अपने फेसबुक अकाउंट को Deactivate करने के बाद फिर से चालू यानि Reactivate कैसे करें। 

अपने facebook id जिसे आप deactivate कर चुके हैं, यदि आप उसे फिर से reactivate यानि चालू करना चाहते हैं, तो आप बस उसी तरह इसे चालू कर सकते हैं जैसे आप log out होने के बाद करते हैं। अपना फेसबुक अकाउंट का मोबाइल नंबर या ईमेल दीजिये और फिर पासवर्ड दीजिये और आप अपने फेसबुक id में log in कर सकते हैं।

फेसबुक अकाउंट permanently delete कैसे करें [ How to Delete Permanentaly your Facebook Account / ID ] ? 

🌎 ऊपर बताए गए Step 1 से Step 5 तक follow करें । Deactivate और Delete के options में से Delete Account को Select करें और Continue to Account Deletion पर क्लिक करें ।

🌍 अब अगले पेज पर आप यदि अपने फेसबुक अकाउंट से सम्बन्धित Information Download करना चाहते हैं, तो डाउनलोड कर लें ।

[ नोट : यदि आप Messenger पर Active रहना चाहते हैं, तो आप account को deactivate करें ना कि Delete । Account Delete करने के बाद आप ऐसा नहीं कर पाएंगे । Account Delete करने के बाद आपका Account Deletion के लिए scheduled हो जाएगा । आप 30 दिनों के भीतर कभी भी अपनी ID को दुबारा चालू कर सकते हैं । ]

🌍 अब Delete Account पर click करें । अगले पेज पर अपना Facebook Paasword दर्ज करें और Continue पर क्लिक करें । आप Your Account is Scheduled for Permanent Deletion ऐसा कुछ देखेंगे और इस तरह आपका Facebook Id 30 दिनों बाद Facebook से हटना शुरू हो जाएगा ।


Blogspot blog ki basic setting kaise karte hain

4/27/2020 0
Blogspot blog ki  basic setting kaise karte hain

Blogspot  blog ki basic setting kaise Karen ; Doston, ydi aap bhi blogging karte hain aur aapne bhi blogger par free blog bnaya hai; to blog banana ke bad sabse pahle hamen apne blog ki setting krni hoti hai. Is setting ke dwara ham apne blog ko seo friendly bhi banate hain aur isse kuchh basic settings bhi ho jati hai. To aaieye jaante hain ki ham apne blogger/blogspot  blog ki setting kaise karte hain.

[ HOW TO SET UP BLOGSPOT BLOG IN HINDI ]
[ BLOG KI IMPORTANT BASIC SETTING KAISE KAREN : STEP BY STEP JAANKARI HINDI MEIN ]

[ BLOG KI SETTING KAISE KARE – Step- 1 ]

·      Sabse pahle aap apne blogspot blog mein LOG IN ho jayen. Ab blooger ki dashboard par aap left mein setting par click Karen.

·      Setting par click karne ke baad aapko total 7 options dikhay denge.
1.   BASIC
2.   POSTS, COMMENTS AND SHARING
3.   EMAIL
4.   LANGUAGE AND FORMATTING
5.   SEARCH PREFERENCES
6.   OTHER
7.   USER SETTINGS

[ BLOGSPOT BLOG KI BASIC SETTINGS : Step -2 ]


AB DOSTON, HAM SABSE PAHLE APNE BLOG KI BASIC SETTING KARTE HAIN. Basic par click Karen.

*TITLE – yahan aap apne blog ka jo title hai, use likhen.

*DESCRIPTION – Yahan aapka blog kis subject se related article publish karta hai, yani aapka blog kis subject se related hai, uske bare mein ek description likhen.

*PRIVACY – Yahan listed on blogger, visible to search engines select Karen.

*BLOG ADDRESS – Yahan aapke blog ka address hota hai. E.g. knockmefast.blogspot.com

*HTTPS – Ise yes kar den. Ye blog ki security aur seo ke lihaj se bahut mahatvapurna hai.

*BLOG AUTHOR – Isme blog ka admin ka name aur uska email hota hai.

*BLOG READERS – Ise public kar den, taaki aapka blog publicacly publish ho sake aur sabhi log is blog ki articles ko read kar saken.

[ Blog ki basic settings kaise Karen : Step-3 ]

*POSTS, COMMENTS AND SHARING : Is par click Karen.

*Show at most – aap apne main page par jitney post dikhana chahte hain, 5, 6 ya 7 – wo likhen.

*POST TEMPLATE KO AISE HI CHHOD DEN

* SHOWCASE IMAGE WITH LIGHTBOX KO YES KAREN.

AB HAM APNE BLOG KI COMMENT KI SETTING KARENGE. AAIEYE JAANTE HAIN BLOG MEIN COMMENT KI SETTING KAISE KAREN.

COMMENT LOCATION – Ise embedded kar den. Embedded kar dene se bgair kisi lag lapet ke comment ka option aapke post k baad show hota hai.

Full page – ise select karne se jab koi visitor aapke blog post par koi comment karna chahega to yah ek new page par open hogi. Mostly blogger embedded options ko hi select kar ke rakhte hain.

Popup window – ydi aap chahte hain ki aapka comment box ek popup window ki tarah open ho to aap is option ko select Karen.

Hide – ydi aap ye chahte hain ki aapke blog par koi visitor comment na kare to aap ise hide kar sakte hain.

Who can comment – ydi aap chahte hain ki aapke blog par comment ka option har visitors ke liye available ho to aap anyone wale option ko select Karen. Ydi aap chahte hain ki aapke blog par kewal wahi visitor comment kare jiske paas google account ho to aap user with google account select kar sakte hain. Ydi aap ye chahte hain ki aapke blog ke members ke liye hi kewal commenting ka options available ho to aap only members of this blog ko select Karen. Waise aage hamen comment moderation ki setting bhi karni hai to aap anyone select kar len.

Comment Moderation – Yahan is setting ke dwara ham kisi bhi visitors ke comment ko jab tak manually approve nhi karenge, tab tak wah comment publish nhi hoga. Doston, jab koi visitor hamare blog par comment karta hai to pahle hamen us comment ko padh lena chahiye aur lage ki ise approve kar dena chahiye to aap ise approve kar den aur wah comment aapki approval millte hi publish ho jaegi.

Comment Moderation me hamen teen options milte hain –
1.   Always
2.   Sometimes
3.   Never
Aap comment option ko always moderate kar len. Always select karne se aap every comments ko jab tak approve nhi karenge, wo publish nhi hoga. Ydi aap sometimes select karte hain, to comments mein aisa kuchh special rahne par wo aapke aaroval ke liye show hoga, otherwise wo bgair aapke approval ke hi show ho jaaega. Ydi aap never wale option ko select karte hain, to sabhi comments bgair kisi ki approval ke direct publish ho jaaega. Isliye aap Comment moderation ko always select kar len.

Show word verification – Ise aap no kar den. Anayatha ydi aap chahte hain ki jab koi visitors aapke blog post par comment kare aur use captcha se hokar gujarna pade, to aap word verification ko yes kar sakte hain.

[ blogspot blog ki setting kaise Karen : Step-4 ]

Yahan ham apne blog ke email ki setting karenge. Iske baaren mein details mein ham baad mein jaanenge. Philhal ham yahan iski setting karenge aur jaruri cheezon ko janenge.

*Email par click Karen. Ab post using email me aapko ek email id daalni hoti hai. 4 se 12 letters ka kuchh secret word daalna hai box mein, jahan secret word likha hua hai.

*Publish email immediately – Is option ko slect karne se ydi koi bhi aapki blogger email id me koi post bhejega to wo aapke blog mein immediate publish ho jaaegi.

*Save email as draft – agar aap is option ko select karoge to aapke blogger email id me aane wala mail draft ke roop me aapke blog post me save ho jaaega. Isse aap apne blog post ko review karne ke baad ydi use publish karna chahen to publish kar sakte ho. Isliye yadi aapne koi blogger email id banayi hai to isi option ko select Karen.

*DISABLED – Iska mtlab ye hai ki yadi aapke blogger email id pe koi post aati hai aur aapne is option ko select kiya hai to yah na to publish hoga aur na hi post draft ke roop mein aapke blog mein save hoga.

*Comment notification email – yahan by default aapki gmail id hoti hai. Yadi aap apne blog par kiye gaye comment ki jaankari is email par nahi pana chahte hain to ise remove kar sakte hain.

*Email post to – yahan aap email id add kar sakte ho. Un email par aapke dwara publish kiye jane wale new post ka automatic update chala jaaega. Yah option un logon ke liye  ek subscription email ki tarah hi hoti hai jinka email id yahan daala gaya hai. Antar yahi hai ki aap yahan wahi email id daal sakte hain jinse aapke blog ko subscribe nhi kiya gaya hai.

[ blogspot blog ki puri setting kaise Karen : Step-5 ]

Language and formatting – yahan ham apne blog ki language yani bhasha sambandhi setting karenge.  Language me ydi aapka blog hindi mein hai to hindi select Karen. Yadi English mein hai to English select Karen.

·      Enable transliteration – yadi aap transliteration enable karna chahte hain to ise select Karen.
·      Time zone – yahan GMT+5:30, Joki india ka standard time hai, select Karen.
·      Date header, timestamp aur comment timestamp format ko aap apni pasand ke anusar set kar len.

[ blogspot ki puri setting : Step-6 ]

Search prefrance : yahan aapko philhal do hi setting karni hai, jo blog ke seo aur ranking ke liye behad important hai. Search prefrence par click kijiye. Ab yahan aapko Meta discription add karna hai. Ye Blog ki SEO Yani search engine optimization ke liye bahut zaroori hai. Aapka blog jis sambandh mein hai yani jis niche se related hai, us sambandh mein ek discription add karen. Isse search engine ko yah jaanne mein aasani hoti hai ki yah blog phalane niche par article publish karta hai. Isse blog ki ranking bhi increase hogi.

Search prefrence mein jo dusri setting karni hai wo hai custom robots header tag. Is sambandh mein jldi hi ek article publish karunga. Bgair jaankari ke aap ise set na karen.

[ Blog ki basic setting kaise karen : Step -7 ]

Other aur user setting aap khud bhi kar sakte hain.

Ab hamne lagbhag apne blog ki puri basic setting kaise karte hain ki jaankari prapt kar chuke hain. ye kisi bhi new blogger ke liye bahut hi jaruri hota hai. Is setting ke dwara ham apne blog ko search engine friendly bana sakte hain. agar aapko apne blogspot blog ki basic setting karne mein koi problem ho to aap hamen comment mein pooch sakte hain.

*post ko apne social media account par share jarur karen.*

10/29/2019

Bit, Byte, Nibble, KB, MB,GB क्या है ?

10/29/2019 0
Bit, Byte, Nibble, KB, MB,GB क्या है ?

Bit, Byte, Nibble, KB, MB, GB क्या है ? इनके FULL FORMS क्या होते हैं और KILOBYTE = MEGABYTE = GIGABYTE आदि में क्या समबन्ध होते हैं । 1 GIGABYTE कितने MEGABYTE के बराबर होता है ? इस ARTICLE के जरिये हम इन तमाम चीजों को समझने का प्रयास करेंगे ।
Measurements of computer memory

आइए, जानते हैं कंप्यूटर से सम्बन्धित इन मापों के बारे में ।









बिट ( Bit) क्या होता है ?

बिट Binary Digit का सबसे छोटा रूप है, जिसे 0 या 1 के रूप में व्यक्त किया जाता है । यह बिट कंप्यूटर की memory का सबसे छोटा भाग होता है । कंप्यूटर में सभी डाटा व परिणाम बाइनरी डिजिट या Bit में ही व्यक्त किया जाता है । इन डाटा का भंडारण भी यानि Store भी बिट में ही किया जाता है । इस प्रकार, बिट memory को दिखाने वाला सबसे छोटा इकाई होता है ।

Nibble ( निबल ) क्या होता है ?

निबल चार बिट के समूह को कहते हैं । यह आधे बाइट के बराबर होता है । इस प्रकार, 2 निबल = 1 बाइट

बाइट ( Byte ) क्या होता है ?

जिस प्रकार 2 निबल 1 बाइट के बराबर होता है, उसी प्रकार, यदि हम byte और bit के मध्य समबन्ध देखेंगे तो यह 8 बिट के बराबर होता है । जब हम कंप्यूटर में किसी letter या किसी character को टाइप करते हैं तो इसके लिये न्यूनतम आठ बिट यानि 1 बाइट की जरुरत पड़ती है । यहां तक कि कंप्यूटर में एक space यानि खाली स्थान भी 1 बाइट जगह घेर लेता है । कंप्यूटर की memory बाइट में ही मापी जाती है । 1 बाइट या 8 बिट के द्वारा हम कुल 256 कैरेक्टर निरुपित कर सकते हैं ।

आइए, अब हम यह जानते हैं कि कंप्यूटर में शब्द की लंबाई ( Word Length ) का क्या मतलब होता है ।

शब्द की लंबाई यानि Word Length किसी एक कंप्यूटर के लिये निश्चीत होती है, वहीं यह एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में अलग-अलग हो सकती है । शब्द की लंबाई अलग-अलग कंप्यूटर में 1 बिट से 64 बिट तक हो सकती है । सुपर कंप्यूटर में शब्द लंबाई यानि Word Length 64 बिट होती है । इस प्रकार यह स्पष्ट है कि किसी कंप्यूटर के लिये शब्द की लंबाई का समबन्ध कंप्यूटर के Hardware से होता है ।

MEASUREMENTS OF COMPUTER MEMORY ( कंप्यूटर की MEMORY को कैसे मापत हैं )

आइए, अब हम यह जानते हैं कि बिट, बाइट, किलोबाइट, मेगाबाइट, गीगाबाइट आदि में क्या गणितीय समबन्ध होता है अर्थात् 1 MB कितने KB के बराबर होता है । इसी प्रकार, 1 GIGABYTE कितने MEGABYTE के बराबर होता है ।

1 Nibble 4 Bit
2 Nibbble 8 Bit / 1 Byte
1 Kilobyte 1024 Byte
1 Megabyte 1024 Kilobyte
1 Gigabyte 1024 Megabyte
1 Terabyte 1024 Gigabyte
1 Petabyte 1024 Terabyte
1 Exabyte 1024 Petabyte
1 Zettabyte 1024 Exabyte
1 Yottabyte 1024 Zettabyte
   
Read More   डोमेन नाम सिस्टम ( DNS ) क्या होता है ?



सॉफ़्टवेयर क्या होता है ? यह कितने प्रकार का होता है ?
   
   

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150 Computer Related Abbreviations
Operating System क्या है ? यह कितने प्रकार का होता है ?
कम्पाइलर, असेम्ब्लर और इंटरप्रेटर क्या होता है ?
कंप्यूटर से सम्बन्धित परीक्षा के लिये उपयोगी प्रश्न व उनके उत्तर : जरुर पढ़ें


9/24/2019

List of 150 Computer Science Related Abbreviations

9/24/2019 0
List of 150 Computer Science Related Abbreviations
List of 150 Computer Science Related Abbreviations for learners. This list is also useful for competitive examinatios.

List of Common Computer Abbreviations 

Computer Related Important Abbreviations list soochi



A/D Analog to Digital
ADSLAsymetric Digital Subscriber Line
AIArtificial Intelligence
ATMAutomatic Teller Machine
AMDAdvanced Micro Device
AMAmplitude Modulation
AGPAccelerated Graphics Port
AMPAccelerated Mobile Pages
ARPANETAdvanced Research Project Agency
Network
BPSBits Per Second
B2BBusiness to Business
B2CBusiness to Consumer
BCRBERRY Code Reader
BPIBits Per Inch
BCC Blind Carbon Copy
BASICBeginners All Purpose Symbolic Instruction
Code
BCDBinary Coded Decimal
BIOSBasic Input Output Device
CDCompact Disk
CADComputer Aided Design
CALComputer Aided Learning
C-DOTCentre for Development of
Telematics
CAMComputer Aided Manufacturing
CCTLDCountry Code Top Level Domain
C-DACCentre for Development of Advanced Computing
CUControl Unit
CPUCentral Processing Unit
CLASSComputer Literacy And Studies in School
CRTCathode Ray Tube
COMALCommand Algorithmic Language
CPICharacter Per Inch
CD-ROMCompact Disk Re-writable
CMYCyan-Magenta-Yellow
DNDomain Name
DNSDomain Name System
DDSDigital Data Storage
DVDDigital Video Disk /
Digital Versatile Disk
DOSDisk Operating System
DPIDots Per Inch
D-RAMDynamic RAM
DTPDesk Top Publishing
DIMMDual inline MEMORY Module
EXEExecution
E-MAIL Electronic Mail
E-BUSINESS Electronic Business
E-COMMERCE Electronic Commerce
ERNETEducation and Research Network
EPROMErasable Programmable Read Only
Memory
FTPFile Transfer Protocol
FATFile Allocation Table
FLOPFloating Point Operation
FMFrequency Modulation
FDMFrequency Division Multiplexing
FSKFrequency Shift Keying
GBGigs Bytes
GSMGlobal System for Mobile
GIGOGarbage-in-Garbage-Out
GPSGlobal Positioning System
GPRSGeneral Pocket Radio Service
GUIGraphical User Interface
GIFGraphics Interchange Format
HTTPHyper Text Transfer Protocol
HPHewlett Packard
HTMLHyper Text Mark-up Language
HLLHigh Level Language
HDHigh Definition
IBMInternational Business Machine
ITInformation Technology
ICIntegrated Circuit
ISOInternational Standards Organisation
IRCInternet Relay Chat
IPInternet Protocol
IMInstant Messaging
I/OInput- Output
IABInternet Architecture Board
IEEEInstitute of Electrical and Electronics Engineers
ISPInternet Service Providers
JPEGJoint Photographic Expert Group
KBKilo Bytes
LCDLiquid Crystal Display
LEDLight Emitting Diode
LANLocal Area Network
LSDLeast Significant Digit
LISPList Processing
LASERLight Amplification for Stimulated Emission
Of Radiation
MBMega Bytes
MBPSMega bits per Second
MHZ Mega Hertz
MODEMModulator-Demodulator
MTNLManager Telephone Nigam Limited
MSMicrosoft
MOPSMillion Operations per Second
MICRMagnetic Ink Character Recognition
MANMetropolitan Area Network
MSIMedium Scale Integration
NIXINational Internet Exchange of India
NICNETNational Informatics Centre Network
OSOperating System
OMROptical Mark Reader
OSSOpen Source Software
PDFPortable Document Format
PMPhase Modulation
PCPersonal Computer
PCBPrinted Circuit Board
PDAPersonal Digital Assistant
PPMPages Per Minute
POSTPower On Self Test
PROLOGProgramming in Logic
PPPPoint to Point Protocol
ROMRead Only Memory
RAMRANDOM Access Memory
SEOSearch Engine Optimisation
SERPSearch Engine Result Page
SMSShort Messaging Service
SCSISmall Computer System Interface
SSISmall Scale Integration
SQLStructured Query Language
SVGASuper Video Graphics Array
TBTera Byte
TLDTop Level Domain
TDMTime Division Multiplexing
UPSUninterrupted Power Supply
URLUniform Resource Locator
UNIVACUniversal Product Code
USBUniversal Serial Bus
UPCUniversal Product Code
VDUVideo Display Unit
VANValue Aided Network
VIRUSVital Resource Under Source
VSATVery Small Aperture Terminal
WANWide Area Network
W3CWorld Wide Web Consortium
WWWWorld Wide Web
WIMAXWorld Wide Interoperability for Micro-wave Access
WLLWireless Local Loop
2G2nd Generation Wireless Networking
3G3rd Generation Wireless Networking
4GL4th Generation Language
 This is very Common  Co

 computer abbreviations which often used.


9/23/2019

Operating System सॉफ्टवेयर क्या है ? इसके प्रकार सहित जानकारी

9/23/2019 0
Operating System सॉफ्टवेयर क्या है ? इसके प्रकार सहित जानकारी
ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर ( Operating System ) सिस्टम सॉफ्टवेयर का ही भाग है । सॉफ्टवेयर को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है - सिस्टम सॉफ्टवेयर, ऐप्लिकेशन सॉफ्टवेयर और यूटीलिटी सॉफ्टवेयर । इसी प्रकार सिस्टम सॉफ्टवेयर के भी दो भाग हैं - ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर और लैंग्वेज ट्रान्सलेटर सॉफ्टवेयर । 

यहां हम मुख्य रूप से Operating System से सम्बन्धित terms पर focus करेंगे । मसलन, Operating System ( ऑपरेटिंग सिस्टम )क्या होता है, यह कितने प्रकार का होता है ( Types of Operating System ), Operating System का Computer में क्या कार्य है अर्थात् OS के उपयोग और ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर के उदाहरण ( Examples of Operating System सॉफ्टवेयर ) आदि ।
OS के प्रकार, OS क्या है - उदहारण सहित जानकारी


Operating System क्या है ?

What is Operating System in hindi ?


Operating System दरअसल एक Software है । यह सिस्टम सॉफ्टवेयर का ही भाग है । आप यह भी जानते हैं कि सिस्टम सॉफ्टवेयर के बिना कंप्यूटर एक लोहे और अन्य पुर्जों से बना एक बिना जान की सामग्री भर रह जाएगा । यह Software ही होता है जो उसमे जान डालता है और उसे विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयोगी बनाता है । ये सिस्टम सॉफ्टवेयर से सम्बन्धित चीजें हैं । जैसा कि आपने जाना कि Operating System सॉफ्टवेयर भी एक प्रकार का सिस्टम सॉफ्टवेयर ही है, इससे आप ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर का कंप्यूटर में क्या महत्व है, इसका बखूबी अंदाजा लगा सकते हैं ।


Operating System – यह एक प्रकार का प्रोग्राम अथवा प्रोग्रामों का समूह है । यह कंप्यूटर और उससे जुड़े चीजों को नियंत्रित करता है । यह कंप्यूटर के हार्डवेयर, ऐप्लिकेशन सॉफ्टवेयर और इसके उपयोग करने वालों के बीच एक सम्बन्ध जोडत है । Operating System के बिना अर्थात इसके ना होने पर कंप्यूटर का हार्डवेयर किसी program को run नहीं कर सकता । इस प्रकार, Operating System Computer Hardware को निर्देशित करता है और इसी निर्देश के अनुसार कंप्यूटर का हार्डवेयर किसी ऐप्लिकेशन प्रोग्राम को run करता है ।



Compiler, Assembler, Interpreter aur Language translator की पूरी जानकारी




150 कंप्यूटर कंप्यूटर सम्बन्धी abbreviatios




कंप्यूटर समबन्धी महत्त्वपूर्ण प्रश्न उत्तर




डोमेन नाम क्या है ? Domain Name System की पूरी जानकारी ।




Software क्या होता है ? कितने प्रकार का होता है ? पूरी जानकारी ।


कंप्यूटर में Operating System के कार्य और उपयोग / महत्व : Operating System सॉफ्टवेयर के कंप्यूटर में बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य हैं । Computer में ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर के उपयोग और महत्व को हम निम्नलिखित रूप में समझ सकते हैं ।

● ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर के प्रयोक्ता और कंप्यूटर हार्डवेयर के मध्य सम्बन्ध स्थापित करता है । कंप्यूटर हार्डवेयर OS के द्वारा निर्देश प्राप्त कर किसी ऐप्लिकेशन प्रोग्राम को run करता है और इस प्रकार कंप्यूटर के उपयोगकर्ता को वांछित जानकारी उपलबध कराता है ।


●जब हम कंप्यूटर को on करते हैं तो ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर अन्या सॉफ़्टवेयर को Secondary Memory से Primary Memory में ले जाता है । इसके साथ-साथ यह कुछ मूल क्रियाओं को स्वत: ही आरम्भ कर देता है ।

●यह कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर और डाटा को अवैध प्रयोग से सुरक्षित रखता है और इससे सम्बन्धित Warning भी देता है । इस प्रकार ऑपरेटिंग सिस्टम में User Security भी होती है और किसी अवैध तरीके से यह डाटा को नष्ट होने से बचाता है ।

●कंप्यूटर के विभिन्न त्रुटियों ( Errors ) को बतलाना जिसका सम्बन्ध हार्डवेयर तथा सॉफ़्टवेयर से होता है ।

●ऑपरेटिंग सिस्टम Store होने वाले डाटा को अलग रखता है । यह कार्य इस प्रकार किया जाता है ताकि डाटा एक से दूसरे में मिक्स ना हो ।

●Operating System फ़ाईल managment, Memory व Store Managment सम्बन्धी कार्य भी करता है । Operating System सॉफ्टवेयर को हम Resource manager के तौर पर भी काम करते हुए पाते हैं । यह निर्देशित करता है कि सीपीयू को किस टाईम पर कौन सा कार्य करना है, सिस्टम की memory किस प्रोग्राम के लिये इस्तेमाल होगा आदि ।

OS Storage सम्बन्धी कार्य करता है कि कंप्यूटर के डाटा files को कंप्यूटर में किस स्थान पर सुरक्षित रखना है ।
Operating System सॉफ्टवेयर क्या है इन हिन्दी


ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण

( Examples of Operating System )

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) के उदाहरण ( Examples ) निम्नलिखित हैं :

•Google Chrome OS

•Android OS

•Apple Mac OS

•Microsoft Windows ⬇️

➡️Windows 10➡️Windows 7➡️Windows Vista ➡️Windows 95➡️Windows 98➡️XP ➡️ME

•Unix

•Xenix

•Linux

•Microsoft DOS आदि ।

ये कुछ मुख्य Operating System के उदाहरण हैं ।


Types of Operating System / ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार


आपने ऊपर कुछ प्रचलित Operating System का उदाहरण देखा । अब आपके सामने यह सवाल आ रहा होगा कि क्या ये सभी ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर एक ही तरह के कार्य सम्पादित करते हैं ? हमने ऊपर ऑपरेटिंग सिस्टम Computer System के लिये किस प्रकार उपयोगी है और क्या कार्य करता है - इसे भी जाना । आइये, अब हम Operating System ( OS - ऑपरेटिंग सिस्टम ) कितने प्रकार के होते हैं  ( TYPES OF OS ), के सम्बन्ध में जानते हैं ।


Operating System कई प्रकार के होते हैं और कंप्यूटर में इनके भिन्न-भिन्न उपयोग हैं । Operating System निम्नलिखित प्रकार ( Types ) के होते हैं :-

Batch Processing OS

Real Time OS

Single OS

Multi Programming OS

Multi Processing OS

Multi Tasking OS

Multi User OS

Open Source OS

Closed Source OS

EMBEDED Operating System


Batch Processing Operating System ( बैच प्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम ) - विकास क्रम के आधार पर यह सर्वप्रथम प्रयोग किये जाने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम में से है । इस OS का प्रयोग खासकर ऐसे कार्यों में होता है जिसे करने के लिये हमारे हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती । इसके लिये बैच मॉनिटर सॉफ्टवेयर प्रयोग में लाये जाते हैं । Batch Processing Operating System का अब बहुत ही सीमित प्रयोग अब होता है ।


Real Time Operating System ( रियल टाईम OS ) - रियल टाईम ऑपरेटिंग सिस्टम किसी निश्चित समय सीमा के अन्दर परिणाम देता है । इस ओएस में प्रोग्राम का Response time  बहुत तीव्र होता है । इसमें एक प्रोग्राम का output दूसरे प्रोग्राम के लिये input हो सकता है और जब एक प्रोग्राम को run करने में देरी होती है तो इससे दूसरा प्रोग्राम प्रभावित हो सकता है । परमाणु भट्टी, चिकित्सा, रेलवे रिजर्वेशन आदि में रियल टाईम ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग किया जाता है ।


Single Operating System ( सिंगल ऑपरेटिंग सिस्टम )- Computer अपने विकास क्रम में आगे बढ़ता गया और फिर हमें इस तरह के OS की जरुरत हुई । इसमें user को अधिक सुविधा मुहैया कराये जाने पर बल दिया गया ।


Multi Programing Operating System ( मल्टी प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम ) - इसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह एक साथ कई कार्य कर सकता है । जब कोई Operating System एक समय में एक से अधिक प्रोग्राम को चलाता है, तो इसे मल्टी प्रोग्रामिंग ओएस कहते हैं । उदाहरण के लिए, जब आप अपने कंप्यूटर में एक साथ इंटरनेट भी चला रहे होते हैं, excel में काम भी कर रहे होते हैं और गाना भी सुन रहे होते हैं, तो यह मल्टी प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम की वजह से सम्भव हो पाता है । एमएस विंडोज़ एक मल्टी प्रोग्रामिंग Operating System है ।
इसमें एक प्रोग्राम जब run कर लिया जाता है तो दूसरा प्रोग्राम run करने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है और इससे run करने में लगने वाला कुल समय कम हो जाता है । ऐसे Operating System कंप्यूटर की Central Processing Unit - CPU को हमेशा व्यस्त रखता है ।


Multi Processing Operating System ( मल्टी प्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम )- इसमें एक साथ दो या अधिक processor को जोड़कर उनका उपयोग किया जाता है । इससे कार्य शीघ्रता से हो पाता है । मल्टी प्रोसेसिंग से तात्पर्य है - एक साथ दो प्रोग्राम को run किया जा सकता है ।


Multi Tasking Operating System ( मल्टी टास्किणऑपरेटिंग सिस्टम )- इसमें भी हम एक साथ कई कार्य कर पाते हैं । इसमें हम कार्यों की प्रगति को भी ऑन स्क्रीन देख सकते हैं ।


Multi User Operating System ( मल्टी यूज़र ऑपरेटिंग सिस्टम)- नाम से ही स्पष्ट है कि ऐसे ऑपरेटिंग सिस्टम में एक साथ एक से अधिक users कार्य कर सकते हैं । यह कार्य networking पर होता है जहां एक साथ कई users सक्रिय होते हैं । Linux और Unix मल्टी यूज़र ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण हैं ।


Embeded Operating System ( इम्बेडेड ऑपरेटिंग सिस्टम)- Embed का अर्थ होता है अन्त: स्थापित करना । यह पूरे उपकरण के एक भाग में स्थापित होते हैं । यह उपकरण के अन्दर स्थित प्रोसेसर के प्रयोग हेतु बनाया जाता है ।डिजिटल घड़ियाँ, MP3 Players, Microwave आदि में प्रयोग किया जाता है ।


Open Source सॉफ्टवेयर ( ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर)- जब कोई Software developer द्वारा तो उसकी launching के साथ उसका सोर्स कोड नहीं दिया जाता । यह कोड Developer अपने पास रखता है । इसलिए इस सोर्स कोड तक आपकी पहुंच ना होने के कारण आप इसमें किसी तरह का कोई बदलाव नहीं कर सकते । ऐसे सिस्टम closed OS तथा जिसका सोर्स कोड सबके लिये उपलब्ध होता है और हम इसमें जरुरत के अनुसार परिवर्तन भी ला सकते हैं , Open Source operating system कहलाते हैं । लीनक्श और एंड्रॉइड ओएस ओपेन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है जबकि एमएस विंडोज़ क्लोज़्ड सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है ।


तो, आज हमने ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है, इसके उदाहरण और Operating System के प्रकार आदि की जानकारी लेने का प्रयास किया । आप निम्नलिखित जानकारी भी देख सकते हैं :



Compiler, Assembler, Interpreter aur Language translator की पूरी जानकारी




150 कंप्यूटर कंप्यूटर सम्बन्धी abbreviatios




कंप्यूटर समबन्धी महत्त्वपूर्ण प्रश्न उत्तर




डोमेन नाम क्या है ? Domain Name System की पूरी जानकारी ।




Software क्या होता है ? कितने प्रकार का होता है ? पूरी जानकारी ।


9/21/2019

Language Translator, Compiler, Assembler aur Interpreter क्या है In Hindi

9/21/2019 0
Language Translator, Compiler, Assembler aur Interpreter क्या है In Hindi

आज हम मुख्य रूप से लैंग्वेज ट्रान्स्लेटर सौफ्टवेयर और इसके प्रकार ( Language Translator Software and its Type In Hindi  ), असेम्ब्लर ( Assembler ), कम्पाइलर ( Compiler ), इंटरप्रेटर ( Interpreter ) और Compiler तथा Interpreter में अन्तर ( Difference between Compiler and Interpretar ) के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे ।
कंप्यूटर में Compiler, Assembler और Interpreter क्या होता है ?


यहां जो जानकारी आज हम लेने वाले हैं वो इस प्रकार हैं :-
Language Translator Software क्या है ? यह कितने प्रकार का होता है ?

• सोर्स प्रोग्राम या सोर्स कोड ( Source Program / Source Code ) और ऑब्जेक्ट प्रोग्राम या मशीन कोड ( Object Program Or Machine कोड ) क्या है ?

• Assembler क्या है ?

• Compiler क्या है ?

• Interpreater क्या है ?

• Compiler और Interpreater में क्या अन्तर है ?

तो आइए, क्रमबद्ध रूप से Computer से Related इन Terms पर नजर डालते हैं ।

लैंग्वेज ट्रान्स्लेटर सॉफ़्टवेयर क्या है ?

What is Language Translator Software?


दरअसल Software को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है :
1 System Software
2 Application Software
3 Utility Software
जिस प्रकार Software का तीन भागों में विभाजन किया गया है, उसी प्रकार हम System Software को भी मुख्य रूप से दो भागों में बांट सकते हैं -
1) Operating System Software
2) Language Translator Software
तो इस प्रकार यह स्पष्ट है कि Language Translator Software एक प्रकार का System Software ही है । यदि आप Software क्या होता है और यह कितने प्रकार का होता है- के विषय में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो नीचे लिंक पर क्लिक कर जानकारी प्राप्त कर लें; ताकि बेसिक clear हो जाए ।


Software क्या होता है ? Software कितने प्रकार का होता है ?

लैंग्वेज ट्रान्स्लेटर सोफ्टवेयर ( Language Translator Software ) - कंप्यूटर एक Electronic युक्ति है । यह एक मशीन है जो केवल बाइनरी अंकों को ही पढ़ सकता है अर्थात समझ सकता है । जब कोई निर्देश अथवा सॉफ़्टवेयर प्रोग्राम बाइनरी अंकों में होता है, तो इसे Machine Language यानि मशीन भाषा कहते हैं । कंप्यूटर इस भाषा को समझ जाता है और तदनुरूप उसे Run करता है । इस प्रकार, इस मशीन भाषा में दिए गए command को कंप्यूटर analyse करता है और फिर आवश्यकतानुसार परिणाम ( Output ) देता है ।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि मशीन भाषा में किसी प्रोग्राम को तैयार करना एक कठिन कार्य है । इसके साथ ही प्रत्येक Computer Processor की अपनी यानि स्वयं की एक मशीन भाषा होती है । यह मशीन भाषा उस कंपनी पर निर्भर करती है जो इस processor को बनाता है । इस प्रकार की कठिनाइयों से बचने हेतु Software Program उच्च स्तरीय भाषा ( High level language) में तैयार किये जाते हैं और Language Translator Software का प्रयोग कर इसे मशीन भाषा में Convert कर दिया जाता है ।

High level language यानि उच्च स्तरीय भाषा एक प्रकार की आम बोलचाल की भाषा होती है । इस भाषा में प्रोग्राम तैयार करना मशीन भाषा की तुलना में काफी आसान होता है । इस उच्च स्तरीय भाषा की विशेषता यह है कि यह भाषा किसी कंपनी और उसके द्वारा बनए गए मॉडल पर निर्भर नहीं करती ।

सोर्स प्रोग्राम ( Source Program ) या सोर्स कोड ( Source Code ) : high level language यानि उच्च स्तरीय भाषा में तैयार किया गया प्रोग्राम Source Program कहलाता है ।

ऑब्जेक्ट प्रोग्राम ( Object Program या Machine Code) : जब Translator Software किसी उच्च स्तरीय भाषा को मशीन भाषा में Convert कर देता है, तो इसे मशीन कोड या Object Program कहते हैं ।


लैंग्वेज ट्रान्स्लेटर सॉफ़्टवेयर के प्रकार


( Types of Language Translator Software)




LTS तीन तरह के होते हैं :-
●ASSEMBLER ( असेम्ब्लर )
●COMPILER  और
●INTERPRETER ( इंटरप्रेटर )

असेम्ब्लर ( ASSEMBLER )क्या है ?

( WHAT IS ASSEMBLER IN COMPUTER )

ASSEMBLER एक software प्रोग्राम है । Assembler Low level language ( LLL ) को मशीन भाषा में बदल देता है । इस प्रकार, असेम्ब्लर इस मशीन भाषा में बदले गए कोड को Assemble अर्थात् एक जगह एकत्र करता है और उसे Computer की Memory में स्थापित कर प्रोग्राम को run करने के लिए तैयार करता है । Computer बनाने वाली कंपनियाँ द्वारा Assembler Software उपलब्ध कराया जाता है जो कंप्यूटर processor के प्रकार और Hardware पर निर्भर करता है । इसलिए प्रत्येक processor के लिए Assembler प्रोग्राम भिन्न-भिन्न हो सकते हैं ।
[ SOURCE CODE  ➡️ Assembler Software ➡️ MACHINE CODE ]

NOTE : प्रोग्राम यानि SOFTWARE एक प्रकार का निर्देश है या निर्देशों का समूह है जो कंप्यूटर सिस्टम के कार्यों को नियन्त्रित करता है । यह निर्देश कंप्यूटर को यह बतलाता है कि उसे क्या करना है और क्या नहीं करना है ।
वह भाषा जिसे कंप्यूटर बिना LTS प्रोग्राम के समझ पाती है उसे मशीन भाषा कहते हैं । LTS का मुख्य कार्य यही है कि यह HLL को Machine Code में Convert कर देता है ताकि कंप्यूटर इसे समझ सके और तदनुरूप Output दे सके ।


कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर और compiler, Assembler व interpretar क्या है ?





Compiler क्या है और कंप्यूटर में इसके क्या कार्य हैं ?

What is Compiler in Computer and its function



COMPILER ( कम्पाइलर ) :-


जैसा कि आपने जाना कि LTS यानि भाषा अनुवादक software तीन तरह के होते हैं - Assembler, Compiler और Interpreter । आपने यह भी जाना कि भाषा अनुवादक सॉफ़्टवेयर System Software का एकप्रकार है । तो इस तरह हम Assembler, Compiler और Interpreter को System Software का भाग कह सकते हैं । Compiler
एक लैंग्वेज ट्रान्स्लेटर सॉफ़्टवेयर है । नाम से ही स्पष्ट है कि Language translator का अर्थ है भाषा अनुवादक अर्थात् एक भाषा से दूसरे भाषा में Convert करने वाला सॉफ़्टवेयर । जिस प्रकार Assembler LLT को मशीन भाषा में बदलने का काम करता है, उसी प्रकार Compiler HLL को मशीन भाषा में बदलता है ।

Computer में Compiler के कार्य :- Compile का अर्थ है संकलित करना । तो Compiler एक संकलित करने वाला सॉफ़्टवेयर है । हर HLL के लिए अलग Compiler सॉफ़्टवेयर होता है । Compiler सारे Program को एक बार में Translate कर लेता है और प्रोग्राम की अशुद्धि को एक विशेष क्रम में संसूचित कर देता है । इस प्रकार अशुद्धियों के संशोधन के उपरान्त प्रोग्राम का सम्पादन हो जाता है । प्रोग्राम के सम्पादन हो जाने से सोर्स प्रोग्राम की आवश्यकता नहीं रहती

Compiler ( कंपाइलर ) प्रोग्राम को मशीन कोड में बदलने के पश्चात उसे बखूबी memory में भी store करता है , यद्यपि यह किसी प्रोग्राम को run नहीं करता । एक बार Compiler द्वारा जब किसी प्रोग्राम को compile कर लिया जाता है तो ऐसे प्रोग्राम को चलाने के लिए किसी Compiler की कोई आवश्यकता नहीं होती ।

इंटरप्रेटर क्या है ? इंटरप्रेटर का Computer में क्या कार्य है ?

दोनों में क्या अन्तर है ?


What is Interpreter ? Difference between Compiler and Interpreter in Hindi

Interpreter

का भी यही कार्य है कि यह HLL यानि high level language को Object प्रोग्राम में बदलता है । Compiler और Interpreater के बीच समानता की अगर बात करें, तो दोनों ही सिस्टम सॉफ़्टवेयर अथवा Language Translator के भाग हैं । Compiler और Interpreter दोनों ही HLL को Object प्रोग्राम में Convert करता है । लेकिन इनके कार्य करने के ढंग में कुछ आधारभूत और महत्वपूर्ण अन्तर भी है । यद्यपि दोनों Source कोड को ऑब्जेक्ट कोड में परिवर्तित करता है, लेकिन जहां Interpreter एक एक लाईन कर बारी-बारी से प्रोग्राम को translate करता है, Compiler एक ही बार में कर देता है ।

Interpreter Translate करने के क्रम में अशुद्धियों को भी चिह्नित करता है और इसके संशोधन के बाद ही आगे का काम करता है । Compiler एक साथ ही गलतियों को चिह्नित कर उसे बताता है ।


Interpreter अशुद्धियों के संशोधन में तीव्र होता है, जबकि Compiler की गति धीमी होती है ।


Compile हो जाने के बाद Compiler की आवश्यकता नहीं होती, जबकि प्रोग्राम को चलाने हेतु हर बार Interpreter की जरुरत होती है ।


कुल मिलाकर, जिस तरह Software को तीन भागों में विभाजित किया गया है, उसी प्रकार Compiler, Assembler और Interpreter भी System Software के भाग हैं । ये सभी Language Translator प्रोग्राम हैं और सब HLL या LLL को ऑब्जेक्ट कोड में परिवर्तित करता है, जिससे COMPUTER को यह Machine Language समझ में आ पाती है । इन Softwares के कार्य करने के ढंग में कुछ अन्तर है और ये अपने-अपने Command के हिसाब से कार्य सम्पादित करते हैं ।