72nd Independence Day India

"मर कर भी ना मिटेगी वतन की उल्फत,
मेरी मिट्टी से भी खुश्बू-ए-वतन आएगी !!"
लगभग 2 0 0 वर्षों की गुलामी झेलने के बाद आखिर वह क्षण आ ही गया जिसकी चाहत में ना जाने कितने वीर भारतीय सपूतों ने अपने प्राणों की आहूति दी थी. अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए ना जाने कितनी माताओं की गोद सूनी हो गई. 1 5 अगस्त, 1 9 4 7 भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया. लगभग 1 0 0 वर्षों की एक लम्बी अवधि के संघर्ष के परिणामस्वरूप भारत आखिरकार 15अगस्त, 1947 को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो गया. 1 5 अगस्त, 2018 को हम भारतवासी अपनी आजादी के 7 1वीं सालगिरह मनाने जा रहे हैं. नि:संदेह हर भारतीय के लिए यह बड़ा ही शुभ व महत्वपूर्ण दिन है. यह हमारे लिए किसी उत्सव से बढ़ कर है जिसे हम बड़े धूमधाम व पूरी भावना से मनाते हैं.
1857 में हुए सिपाही विद्रोह को भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन माना जाता है. हालाँकि कई कारणवश यह विद्रोह अपने उद्देश्य में सफल नहीं रहा, तथापि इसने अंग्रेजी राज की जड़ों को हिला दिया. बड़ी निर्ममतापूर्वक अंग्रेजों ने इस विद्रोह का दमन किया. झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने वीरतापूर्वक लड़ते हुए अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे. 1857 से लेकर भारत की आजादी तक भारत के विभिन्न भागों में कई सशस्त्र विद्रोह हुए. अंग्रेजों द्वारा इन विद्रोहों को बड़ी निर्ममता से कुचला गया. आजादी के लक्ष्य को पाने में कितने ही लोग अँगरेजों के दमन का शिकार हुए.
1885 में स्थापित 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' का भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में निश्चय ही महत्वपूर्ण योगदान है. सम्पूर्ण भारत के लगभग तमाम बुद्धिजीवियों का इस संस्था से जुड़ाव हुआ और सबके सम्मिलित प्रयासों का परिणाम भारतीय स्वतंत्रता के रूप में हुआ. हालाँकि कांग्रेस से इत्तर भी कई संगठन खुले अथवा गुप्त रूप में देश और विदेश में इस दिशा में सक्रिय थे. कांग्रेस से संबंधित नेताओं में महात्मा गाँधी, बाल गंगाधर तिलक, विपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय, दादाभाई नौरोजी, सुभाषचन्द बोस, गोपालकृष्ण गोखले, दिनशा वाचा, रासबिहारी घोष, पं. मदनमोहन मालवीय, मोतीलाल नेहरू आदि प्रमुख थे जिनका नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है. इनके अतिरिक्त भारतीय क्रांतिकारियों में चन्द्रशेखर आजाद, वीर भगत सिंह, खुदीराम बोस, प्रफुल्ल चाकी, मास्टर सूर्यसेन, राजेन्द्र लाहिड़ी, रोशन सिंह व अशफाकुउल्ला खां आदि का भारतीय स्वतंत्रता में अविस्मरणीय योगदान रहा जिसे कृतज्ञ राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता. कई तरह की योजनाओं, आन्दोलनों आदि जिनमें स्वदेशी, असहयोग, सविनय अवज्ञा आन्दोलन, भारत छोड़ो आन्दोलन, मुज्जफरपुर बम कांड, काकोरी षडयन्त्र आदि उल्लेखनीय हैं, से गुजरने के बाद अन्तत: भारत 15 अगस्त, 1947 को औपनिवेशिक बेड़ियों को तोड़ने में सफल रहा. यह सफलता पिछले 100 वर्षों के प्रयासों का सम्मिलित परिणाम थी जिसमें भारत के हर वर्ग के लोगों की भागीदारी थी.
आज जबकि हमें आजाद हुए एक लम्बे अरसे बीत गए, हमें कुछ मुद्दों को लेकर आत्म-निरीक्षण की जरूरत है. हर भारतीय का यह नैतिक कर्तव्य है कि वह अपनी इस प्राचीन भारतीय संस्कृति रूपी अमूल्य धरोहर का संरक्षण करे. हमें जरूरत है कि हम अपनी संस्कृति के सामाजिक-नैतिक आदर्शों का संरक्षण करें और तदनरूप आचरण करें. घरेलू हिंसा, बलात्कार, एसिड अटैक जैसी घटनाएँ निंदनीय है और यह भारतीय संस्कृति का क्षरण करने का काम कर रही है, जिसे रोकना हर भारतीय का नैतिक कर्तव्य है.
आज भारत सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन हमारे सामने चुनौतियाँ भी कम नहीं. "भोजन, वस्त्र और आवास"- ये मनुष्य की आवश्यक आवश्यकताएँ हैं जिनके अभाव में मानव जीवन कभी खुशहाल नहीं हो सकता. भारत की एक बड़ी आबादी के पास रहने के लिए घर नहीं है, पौष्टिक भोजन के अभाव में कुपोषण एक बड़ी समस्या बनी हुई है. एक रिर्पोट के अनुसार भारत 18 करोड़ बेरोजगारों का घर है और प्र्त्येक माह देश के कार्यबल में 1 0 लाख नए लोग जुड़ रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य सम्बन्धी मानकों पर भारत का प्रदर्शन बेहद चिंताजनक है. इस प्रकार ये ऐसी समस्याएँ हैं जिन्हें दूर किए बगैर कोई भी राष्ट्र सही मायनों में विकसित होने का दावा नहीं कर सकता. हालाँकि खुशी की बात ये है कि सरकार इन तमाम पहलुओं पर बेहद संजीदगी से काम कर रही है. आशा है हम इन चुनौतियों से पार पा लेंगे.
अब जबकि हम अपनी 7 2 वीं स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं तो हमें इन मूल चीजों पर विचार करते हुए इन्हें दूर करने में खुद की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि हम एक स्वस्थ, स्वच्छ, उन्नत और विकसित भारत के सपनों को साकार कर सकें !!
       🇮🇳वन्दे मातरम्🇮🇳
     !!जय हिन्द!!

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