सार्वजनिक स्वास्थ्य : एक बड़ी चुनौती (टीबी के विशेष संदर्भ में)

भारत में स्वास्थ्य की समस्या एक बड़ी समस्या है ! देश की महँगी स्वास्थ्य सेवाएँ गरीबों की पहुँच से दूर है ! इन सेवाओं की उपलब्धता व सहजता में भारी विषमता दृष्टिगोचर होती है ! ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों के मुकाबले स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है ! यही स्थिति निजी अस्पतालों के मुकाबले सरकारी अस्पतालों में दृष्टिगत होती है ! मेडिकल जर्नल 'लैसेंट' के एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और लोगों तक उनकी पहुँच के मामले में भारत विश्व के १९५ देशों में १४५वें पायदान पर है ! उल्लेखनीय है कि भारत इस सूची में अपने पड़ोसी देश चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान से भी पीछे है ! अध्ययन के अनुसार, तपेदिक(टीबी), दिल की बीमारी, पक्षाघात, कैंसर व किडनी जैसी बीमारियों से निपटने के मामलों में भारत का प्रदर्शन बेहद चिंताजनक है !
१३ मार्च, २०१८ को नई दिल्ली में वैश्विक टीबी सम्मेलन का उद्धाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने २०२५ तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य रखा ! इस मौके पर उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की ! विदित हो कि दुनिया में टीबी के सबसे ज्यादा मरीज भारत हैं! डबल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के एक चौथाई से ज्यादा तपेदिक मरीज भारत में हैं ! २०१५ में भारत में क्षय रोग से मरने वालों की संख्या ५ लाख थी जबकि इसी वर्ष इस बीमारी के २८ लाख नए मामले भी सामने आए थे ! वर्तमान स्थिति यह है कि आज यह बीमारी एक महामारी का रूप ले चुकी है, जिसके मरीज असमय ही काल का ग्रास बन जाते हैं !
सवाल यह उठता है कि जब पोलियो व चेचक जैसी बीमारियों से सफलतापूर्वक निपटा जा सकता है तो फिर टीबी से क्यों नहीं ? इसके लिए व्यवस्थागत् खामियां भी जिम्मेवार हैं ! सम्पूर्ण नागरिकों की जागरूकता से पल्स पोलियो जैसे आदर्श पर काम करते हुए इसे खत्म किया जा सकता है ! इससे निपटने के लिए सरकार ने बजट २०१८ में दस करोड़ रुपये का प्रावधान टीबी मरीजों के पोषण जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया है ! 'स्वच्छ भारत अभियान' व 'उज्जवला' जैसी योजनाएँ भी इसे कम करने में सहायक होंगी !
इनके अतिरिक्त स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति २०१७ के द्वारा स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्रों की परिकल्पना की गई है, साथ ही 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना' के तहत् लगभग ५०करोड़ लाभार्थियों(१०करोड़ परिवार) को प्रति वर्ष प्रति परिवार ५लाख रूपये तक का आच्छादन प्रदान किया जाएगा ! विदित हो कि ये दोनों ही पहल "आयुष्मान भारत" कार्यक्रम के एक भाग के रूप में की गई है !
आवश्यकता इस बात की है कि इन सारे प्रयासों का लाभ इनके असली लाभार्थियों तक पहुँचे ! इसके लिए व्यवस्थागत खामियों को दूर करना होगा ! सरकार के साथ-साथ आम जनता का भी यह नैतिक कर्तव्य है कि वो इन मूल समस्याओं को दूर करने में सरकार का व एक-दूसरे का सहयोग करें, ताकि सही मायनों में देश की प्रगति सुनिश्चित हो सके !

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