भारत में कुपोषण और भूख की गंभीर समस्या

भारत में कुपोषण और भूख की समस्या

किसी भी देश की तरक्की वहाँ के मानव संसाधन की अनदेखी कर सुनिश्चित नहीं की जा सकती ! यह तभी संभव है जब वहां का मानव संसाधन स्वस्थ हो ! भारत में पौष्टिक भोजन के अभाव में कुपोषण की समस्या एक बड़ी समस्या है ! हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में भूख से हुई तीन सगी बहनों की मौत ने सम्पूर्ण राष्ट्र को वस्तुस्थिति से अवगत कराया ! विश्व में रहने वाली कुल आबादी का ९वां हिस्सा कुपोषित है और इसमें एक बड़ी आबादी विकासशील देशों में निवास करती है ! एक आँकड़े के अनुसार भारत की लगभग ४० प्रतिशत आबादी कुपोषित है इन्टरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा जारी 'वैश्विक भूख सूचकांक २०१७' में कुल ११९ देशों की सूची में भारत का स्थान १००वां है ! यह प्रदर्शित करता है कि भारत में भूख कितनी बड़ी समस्या है ! भारत के पड़ोसी देश चीन की आबादी यद्यपि भारत से अधिक है, लेकिन इस सूची में वह २९वें स्थान पर है जबकि नेपाल का स्थान ७२वां है !


* भूख से निपटने के सरकारी प्रयास
यद्यपि इन प्रयासों में सरकार की मिड-डे-मील योजना का महत्वपूर्ण स्थान है जो प्राथमिक एवं मध्य स्तर पर स्कूली बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन का प्रबंध करती है, परन्तु अपेक्षित परिणाम में विलम्ब प्रतीत हो रहा है !


(१६ अक्टूबर, २०१७ ) अंतर्राष्ट्रीय खाद्य दिवस के अवसर पर भारत के तीन जिलों - गोरखपुर, कोरापुट एवं थाणे में 'जीरो हंगर प्रोग्राम' की शुरुआत की गई ! यह जिले 'शून्य भूख लक्ष्य' यानी जीरो हंगर गोल को प्राप्त करने में एक मॉडल की तरह होंगे !कार्यक्रम में बाद में भारत के अन्य जिलों को भी शामिल किया जाएगा ! कार्यक्रम का उद्देश्य भारत को २०२२ तक कुपोषण से मुक्त करना है ! यह उल्लेखनीय है कि भारत संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 'समावेशी विकास लक्ष्यों' का हिस्सा ह जिसके विभिन्न उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए २०३० तक की समय-सीमा का निर्धारण किया गया है !


आशा है कि सरकार के इन प्रयासों से कुपोषण जैसी समस्या से मुक्ति मिलेगी !

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