भारत में बेरोजगारी की समस्या पर निबंध

भारत में बेरोजगारी की समस्या एवं समाधान 

भारत में बेरोजगारी की समस्या

भारत विश्व का दूसरा बड़ा जनसंख्या वाला देश है ! स्पष्ट है कि मानव जैसे विशिष्ट संसाधन देश की प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं, बशर्ते इस संसाधन का समुचित उपयोग हो सके ! देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा बेरोजगार है ! इस प्रकार, किसी राष्ट्र के लिए ऐसे संसाधनों का क्या लाभ ?

बेरोजगारी- यह उस स्थिति का नाम है जब कोई योग्य अथवा काम करने को इच्छुक व्यक्ति प्रचलित मजदूरी की दर पर काम करने को इच्छुक हो, परन्तु उसे काम न मिल पाए ! इस प्रकार वह व्यक्ति काम के अभाव में काम नहीं कर पाएगा और बेरोजगार कहलाएगा ! श्रम बल के होते हुए भी जब कोई राष्ट्र इस श्रम शक्ति का समुचित उपयोग नहीं कर पाता है तो इसका असर राष्ट्र की प्रगति पर पड़ना तय है ! इससे आर्थिक विकास बाधित होने के साथ ही समाज में कई तरह की नकारात्मक स्थितियाँ पैदा होती हैं, जो समाज और देश को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती हैं !

भारत में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है ! भारत १८ करोड़ बेरोजगारों का घर है ! विश्व बैंक के हालिया रिपोर्ट ने यह दावा किया है कि भारत में ३० प्रतिशत से अधिक लोग १५ से २९ वर्षों के बीच हैं, जो शिक्षा,रोजगार अथवा प्रशिक्षण से बाहर हैं ! प्रत्येक माह देश के कार्यबल में १० लाख नए लोग जुड़ रहे हैं ! यही कारण है कि युवा अपनी पढ़ाई पूरी करने के पश्चात विभिन्न अखबारों, इंटरनेट विज्ञापनों आदि में अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार की तलाश करते रहते हैं व विभिन्न कार्यालयों के चक्कर काटते हुए देखे जाते हैं ! इन सबके बावजूद परिणाम अपेक्षित शायद ही मिलते हों !

औपनिवेशिक भारत में लघु एवं कुटीर उद्योगों की स्थिति चरमरा गई ! इनके लिए औद्योगीकरण व मशीनीकरण से मुकाबला करना संभव न रहा ! फलत: इन उद्योगों के ह्रास ने बेरोजगारी को बढ़ाया !

यद्यपि भारत में आजादी के बाद रोजगार सृजन को स्पष्ट रूप से पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में प्राथमिकता दी गई तथा गरीबी के साथ-साथ बेरोजगारी पर विशेष ध्यान दिया गया, तथापि इसमें विशेष कमी नहीं हो सकी ! छठी पंचवर्षीय योजना में भी रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया! सातवीं पंचवर्षीय योजना में 'भोजन, काम और उत्पादन" का नारा दिया गया और जवाहर रोजगार योजना जैसे महत्वपूर्ण रोजगारपरक योजना प्रारंभ किए गए ! देश की आठवीं पंचवर्षीय योजना में मानव संसाधन के विकास को सारे विकास प्रयासों का सारतत्व माना गया ! इस योजना के दौरान 'प्रधानमंत्री रोजगार योजना' की शुरुआत की गई !

दसवीं पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य देश में गरीबी और बेरोजगारी समाप्त करना था ! इस योजना अवधि (२००२_२००७) में पांच करोड़ रोजगार सृजन को लक्षित किया गया ! पुनः बारहवीं पंचवर्षीय योजना अवधि (२०१२_२०१७) में गैर-कृषि क्षेत्र में पांच करोड़ नए रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया ! इसी क्रम में २००६ में नरेगा की शुरुआत हुई जो अब मनरेगा के नाम से जाना जाता है ! लघु उद्योग को गति देने के उद्देश्य से भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक की स्थापना की गई ! वर्तमान में स्टार्ट अप इंडिया, स्टेन्ड अप इंडिया व मुद्रा जैसी योजनाओं का प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य लोगों को रोजगार प्रदान करना ही है !

सारत: यह कहा जा सकता है कि प्रयास तो किए जा रहे हैं, लेकिन समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही ! आवश्यकता इस बात की भी है कि सरकारी योजनाओं का लाभ इनके असली लाभार्थी तो शत-प्रतिशत पहुँचे- इसे सुनिश्चित किया जाए ! व्यवस्थागत् कमियों को दूर किया जाए, साथ ही संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जाए ! इसके साथ-साथ अन्य कदम भी उठाने होंगे जो सर्वसुलभ हो, जैसे- रोजगारपरक शिक्षा आदि ! यह तय है कि बेरोजगारी और गरीबी एक-दूसरे से संबंधित हैं ! जब तक लोगों को रोजगार उपलब्ध नहीं होता, गरीबी भी अपना पांव पसारते जाएगी ! फलत: देश में कुपोषण, भुखमरी जैसी स्थिति पैदा होंगी और मानव-संसाधन का ह्रास होगा जो अन्तत: देश के आर्थिक-सामाजिक विकास को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा

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