INDIAN NATIONAL CONGRESS HISTORY SESSIONS PRESIDENTS 1885-1947 In Hindi

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                Indian National Congress                             Important FACTS FOR INC

                   (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)


1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना सन् 1885 में हुई थी. ALEN OCTIVIAN HUME (A. O. HUME) को इसका संस्थापक अथवा जन्मदाता माना जाता है.


2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन 28 दिसम्बर, 1885 को मुम्बई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज भवन में प्रारंभ हुआ. उल्लेखनीय है कि इस अधिवेशन में विलियम वेडरबर्न और महादेव गोविन्द रानाडे भी उपस्थित थे. ( ये उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी थे)

3. कांग्रेस के इस प्रथम अधिवेशन में 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था.

4. कांग्रेस के इस प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता व्योमेशचन्द्र बनर्जी (W.C. BANARGEE) ने की थी.

5. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दूसरे अधवेशन, कलकत्ता(1886), नौवें अधिवेशन लाहौर(1893) एवं बाइसवें अधिवेशन कलकत्ता(1906) की अध्यक्षता दादाभाई नौरोजी ने की थी. इस प्रकार उन्होंने कांग्रेस के कुल तीन अधिवेशन की अध्यक्षता की.

6. कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन (1906) ( अध्यक्ष-दादाभाई नौरोजी) में प्रथम बार 'स्वराज' शब्द का प्रयोग किया गया था..(स्रोत- ल्यूसेन्ट सामान्य ज्ञान)
                NCERT के अनुसार 'स्वराज' शब्द का पहली बार प्रयोग कांग्रेस के इक्कीसवें अधिवेशन(बनारस-1905, अध्यक्ष-गोपालकृष्ण गोखले) में किया गया था.

7. बदरूद्दीन तैयब जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INDIAN NATIONAL CONGRESS) के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष थे. इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसके तीसरे अधिवेशन (मद्रास-1887) की अध्यक्षता की थी.

8. जार्ज यूल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष थे. इन्होंने 1888 के इलाहाबाद अधिवेशन की अध्यक्षता की थी. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन के अंगरेज अध्यक्षों की संख्या 9 है.

1 0. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1896 के कलकत्ता अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता रहीमतुल्ला सयानी ने की थी, पहली बार 'वन्दे मातरम्' गाया गया.

1 1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1911 के कलकत्ता अधिवेशन में पहली  'जन-गण-मन' गाया गया. इस अधिवेशन की अध्यक्षता पं. बिशननारायण धर ने की थी.

(नोट: यह तथ्य परीक्षा के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है. परीक्षार्थी इसे याद रखें)

1 2. 1907 के सूरत कांग्रेस अधिवेशन में कांग्रेस का प्रथम विभाजन हुआ. इस अधिवेशन की अध्यक्षता रासबिहारी घोष कर रहे थे. नरमपंथी और गरमपंथी नेताओं के मध्य स्पष्ट विभाजन हो गया. यह विभाजन वैचारिक मतभेद का परिणाम था. स्वराज की प्राप्ति के लिए उदारवादियों व उग्रवादियों के विचार भिन्न थे. स्वराज को पाने के दोनों के तरीके भी अलग-अलग थे. इसकी परिणति भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सूरत अधिवेशन में विभाजन के रूप में सामने आई. इस प्रकार भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में उग्रवाद व क्रान्तिकारी विचारधारा का जन्म हुआ.



1 3. ****BPSC SPECIAL FACTS****

**भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 28वां अधिवेशन 1912 में बांकीपुर में हुआ था. इस अधिवेशन की अध्यक्षता आर. एन. माधोलकर ने की थी.

** बिहार के गया में कांग्रेस का 38वां अधिवेशन हुआ था. 1922 में हुए इस अधिवेशन की अध्यक्षता देशबन्धु चितरंजन दास ने की थी.

**तत्कालीन बिहार (अब झारखंड) के रामगढ़ में कांग्रेस का 54वां अधिवेशन हुआ था जिसके अध्यक्ष अबुल कलाम आजाद थे.

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1 4. कांग्रेस के 31वें अधिवेशन (1915 बम्बई) में लार्ड वेलिंगटन ने हिस्सा लिया था. इसके अध्यक्ष सत्येन्द्र प्रसाद सिन्हा थे.

1 5. 1916 में लखनऊ में हुए कांग्रेस अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मध्य समझौता हो गया. इसे ही इतिहास में 'लखनऊ पैक्ट' के नाम से जाना जाता है. इसके साथ ही कांग्रेस के दोनों गुट यानी उदारवादी व उग्रवादी में भी सुलह हो गया. इस प्रकार कांग्रेस का लखनऊ अधिवेशन दो कारणों से महत्वपूर्ण है. इस कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता अंबिकाचरण मजूमदार ने की थी.

1 6. 1918 के बम्बई अधिवेशन में कांग्रेस का दूसरा विभाजन हुआ. इसके अध्यक्ष हसन इमाम थे.

1 7. 1920 के नागपुर अधिवेशन का महत्व कांग्रेस के संविधान में परिवर्तन को लेकर है. इसके अध्यक्ष सी. वी. राधवाचारियार थे.

1 8. 1923 के दिल्ली अधिवेशन की अध्यक्षता अबुल कलाम आजाद ने की थी. वह राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे युवा अध्यक्ष थे.

1 9. कांग्रेस का 42वां अधिवेशन 1926 में गुवाहाटी में हुआ. इसमें सदस्यों के लिए खादी वस्त्र पहनना अनिवार्य कर दिया गया. श्रीनिवास आयगार ने इस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी.

2 0. 1927 में  एम. ए. अंसारी की अध्यक्षता में हुए कांग्रेस के मद्रास अधिवेशन में पूर्ण स्वाधीनता की माँग की गई.

2 1. 1929 में लाहौर में हुए कांग्रेस के 45वें अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज्य' की मांग की गई. 1930 में पहली बार 26 जनवरी  स्वाधीनता दिवस के रूप में मनाया गया. इस लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता पं. जवाहरलाल नेहरू ने की थी. इसके ठीक पहले 1928 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता मोतीलाल नेहरू ने की थी.

2 2. सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में कांग्रेस का कराची अधिवेशन (1931) हुआ. इसमें कांग्रेस द्वारा मौलिक अधिकारों की मांग रखी गई.

2 3. डा. राजेन्द्र प्रसाद ने कांग्रेस के बम्बई अधिवेशन (1934) की अध्यक्षता की थी. (बीपीएससी स्पेशल)

2 4. गांव में आयोजित होने वाला अधिवेशन- फैजपुर अधिवेशन था. इसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी. (1937)

2 5. 1938 हरिपुरा एवं 1939 त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता सुभाष चन्द्र बोस ने की थी.

2 6. 1946 मेरठ अधिवेशन की अध्यक्षता जे. बी. कृपलानी ने की थी.

2 7. 1947 में दिल्ली में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन आयोजित किया गया. इसके अध्यक्ष डा. राजेन्द्र प्रसाद थे.

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       Important Notable Facts about INC.


****भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के समय भारत का गवर्नर जनरल लार्ड डफरिन था.

**** महात्मा गाँधी ने कांग्रेस के केवल एक अधिवेशन की अध्यक्षता की थी. यह अधिवेशन 1924 में कर्नाटक के बेलगाम में आयोजित हुआ था. यह कांग्रेस का 4 0 वां अधिवेशन था.

**** बाल गंगाधर तिलक ने कांग्रेस के किसी भी अधिवेशन की अध्यक्षता नहीं की थी.

****कांग्रेस की स्थापना से भारत की आजादी तक कांग्रेस के कुल 9 अंगरेज अध्यक्ष व कुल तीन महिला अध्यक्ष/अध्यक्षा हुईं.

**** भारत की आजादी के वक्त कांग्रेस के अध्यक्ष जे. बी. कृपलानी थे.

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अंगरेज अध्यक्ष और महिला अध्यक्ष

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संबंधित कुछ चुनिंदा विचार


"सन् 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना न तो एक आकस्मिक घटना थी और ना ही एक ऐतिहासिक दुर्घटना. यह उस राजनीतिक जागरण की प्रक्रिया की चरम परिणति थीजिसका प्रारंभ 1860 व 1870 के दशकों में हुआ और जिसने 1870 के अन्तिम व 1880 के दशक के प्रारम्भिक वर्षों में लम्बी छलांग लगाई थी. "........बिपिन चन्द्र

"यह माना जा सकता है कि ब्रिटिश साम्राज्य को बचाने के लिए कांग्रेस का प्रयोग एक अभय दीप (Saftey Valve) की तरह करने का विचार ह्यूम व वेडरबर्न के हृदय में हों, लेकिन यह नहीं माना जा सकता कि दादाभाई नौरोजी, सुरेन्द्र नाथ बनर्जी, फिरोजशाह मेहता व महादेव गोविन्द रानाडे जैसे भारतीय नेता इनके हाथों के साधन मात्र थे अथवा वे भी ब्रिटिश साम्राज्य को क्रांति के खतरे से बचाने का विचार रखते थे."........गुरुमुख निहाल सिंह

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