जलवायु परिवर्तन के कारण विलुप्त हुए निएंडरथल मानव

साभार दैनिक जागरण
राष्ट्रीय संस्करण
नई दिल्ली, 3 1/0 8/2 0 1 8
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धरती से निएंडरथल मानवों के विलुप्त होने के पीछे एक बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन भी था. यह बात वैज्ञानिकों के एक नवीन अध्ययन में सामने आई है. इसमें उन्होंने पाया कि तापमान में बदलाव के कारण इस प्रजाति की सभी पुरातात्विक कलाकृतियाँ पूरी तरह से विलुप्त हो गईं.
     यह अध्ययन ब्रिटेन स्थित नॉर्थम्ब्रिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है. उन्होंने 40000 साल पहले यूरोपीय जलवायु में परिवर्तन पता लगाने के लिए स्टलैग्माइट (खनिज स्तंभ) का विस्तृत रिकार्ड तैयार किया. इसमें उन्हें जलवायु परिवर्तन की अवधि के बारे में नवीन जानकारियाँ मिलीं.
      पीएनएएस नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने पाया कि कई शीत अवधियां, जिनमें निएंडरथल मानव की पुरातात्विक कलाकृतियाँ पूर्ण रूप से अनुपस्थित थीं इस ओर संकेत करती हैं कि लंबे समय तक वजूद में रहने वाली इस प्रजाति पर जलवायु परिवर्तन का असर पड़ा था.
    यह आया सामने : स्टलैग्माइट की परतों ने 44000-40000 साल पहले यूरोप में लंबे समय तक अत्यधिक ठंड और अत्यधिक सूखे की स्थितियों की एक श़ृंखला दिखाई. ये परत धीरे-धीरे शीतलन तापमान के एक चक्र को हाईलाइट करती हैं. इसमें पता चला कि सदियों तक बहुत ठंड रहने के बाद एकाएक बहुत अधिक गर्मी पड़नी शुरू हो गई. शोधकर्ताओं ने इस रिकार्ड का निएंडरथल की पुरातात्विक कलाकृतियों से तुलना की. इससे उनके विलुप्त होने का कारण सामने आया. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस प्रजाति के विलुप्त होने के कई कारण थे, लेकिन उनमें से एक महत्वपूर्ण कारण जलवायु परिवर्तन भी था.
    इस वजह से पड़ा यह नाम : जर्मनी में निएंडर की घाटी में इस आदि मानव की कुछ हड्डियां मिली थीं. इसलिए इनका नाम निएंडरथल मानव रखा गया. विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि इनका कद मानव की अन्य प्रजातियों की अपेक्षा छोटा था. इनका कद 4.5-5.5 फीट तक था. इनके पश्चिम यूरोप , पश्चिम एशिया तथा अफ्रीका में होने के सुबूत मिले हैं. इनका श्रेणी विभाजन मनुष्य की ही एक उपजाति के रूप में किया जाता है. अध्ययनों से यह भी पता चला है कि इनके बालों का रंग लाल तथा त्वचा पीली थी.

"क्या है स्टलैग्माइट"
स्टलैग्माइट हर साल पतली परतों में बढ़ते हैं और तापमान में कोई भी परिवर्तन उनकी रासायनिक संरचना को बदल देता है. इसलिए परतें हजारों वर्षों में जलवायु परिवर्तन के प्राकृतिक संग्रह को संरक्षित रखती हैं. शोधकर्ताओं ने दो रोमानियाई गुफाओं में स्टलैग्माइट की जांच की. इससे यूरोप महाद्वीप के संबंध में जलवायु परिवर्तन के मौजूद डाटा की तुलना में विस्तृत रिकार्ड प्राप्त हुआ.

(साभार : दैनिक जागरण)
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