105 कैरेट के हीरे कोहिनूर की कहानी (HEERA)

      विश्वप्रसिद्ध कोहिनूर हीरे की कहानी

  (जानिये कोहिनूर हीरे का जन्म कहां हुआ था)

     (अभी कोहिनूर हीरा कहाँ है)

1. कोहिनूर (KOHINOOR) 105 कैरेट का हीरा (DIMOND) है. इसका जन्मस्थान गोलकुण्डा की खान है अर्थात कोहिनूर को गोलकुण्डा की खान से निकाला गया था.


2. कोहिनूर हीरे का प्रथम बार उल्लेख अलाउद्दीन खिलजी के समय में मिलता है. अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत का एक साम्राज्यवादी शासक था. अलाउद्दीन खिलजी के समय ही दक्षिण भारत में सबसे पहला आक्रमण किया गया. यह आक्रमण तेलंगाना पर किया गया था. इस समय तेलंगाना का शासक प्रतापरूद्र देव था. प्रतापरूद्र देव ने अपनी एक सोने की मूर्ति बनवाकर और उस मूर्ति के गले में सोने की जंजीर डालकर आत्मसमर्पण हेतु अलाउद्दीन के सेनापति मलिक काफूर के पास भेजा था. इसी अवसर पर प्रतापरूद्र देव ने मलिक काफूर को विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भेंट किया था.
Kohinoor heera ka itihas


3. कोहिनूर का दूसरी बार उल्लेख मुगल सम्राट बाबर के काल में मिलता है जब मालवा के शासक महमूद द्वितीय ने इस हीरे को हुमायूँ कोसौंपा था.


4. मुगल सम्राट शाहजहाँ के समय पुनः इस हीरे का उल्लेख मिलता है. इस बार कोहिनूर गोलकुण्डा के प्रधानमंत्री मीर गुमला द्वारा शाहजहाँ को सौंपा गया था.

5. नादिरशाह का भारत पर आक्रमण के समय मुगल बादशाह मुहम्मद शाह ने इसे फारस के आक्रमणकारी नादिरशाह को दिया.

6. इस प्रकार कोहिनूर अफगानिस्तान पहुँच गया. अफगानिस्तान का भगोड़ा शासक शाहशुजा ने इसे सिख्ख शासक महाराजा रणजीत सिंह को दिया. अब कोहिनूर हीरा पुनः भारत पहुँच गया.


7. रणजीत सिंह का पुत्र दिलीप सिंह था. गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी के काल में पंजाब का विलय ब्रिटिश राज्य में हो गया. लार्ड डलहौजी को यह हीरा दिलीप सिंह से प्राप्त होता है.

8. इसके पश्चात लार्ड डलहौजी ने यह कोहिनूर हीरा ब्रिटिश महारानी को भेंट किया. वर्तमान में कोहिनूर ब्रिटिश राजमहल में सुरक्षित है.

9. कोहिनूर हीरे के बारे में यह कहा जाता है कि यह एक शापित हीरा है. कोहिनूर जिस किसी के पास भी रहा, उसका विनाश हो गया.

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