महमूद गजनवी के भारत पर 17 आक्रमण का सिलसिलेवार वर्णन

महमूद गजनवी का भारत पर 17 [सत्रह] आक्रमण एवं सोमनाथ की लूट 

गजनवी साम्राज्य और भारत पर प्रथम तुर्क-आक्रमण :-

923ई. में अलप्तगीन नामक एक तुर्क ने गजनी में स्वतन्त्र राज्य की स्थापना की थी. अलप्तगीन की मृत्यु के बाद कुछ समय के लिए गजनी पर पिरीतिगीन का शासन रहा.इसी के शासनकाल में पहली बार भारत पर आक्रमण किया गया. प्रथम तुर्क आक्रमण के समय पंजाब में हिन्दूशाही वंश का राजा जयपाल का शासन था. बढ़ते घटनाक्रम के बीच 977 ई. में सुबुक्तगीन गजनी के सिंहासन पर आसीन हुआ. महमूद गजनवी सुबुक्तगीन का पुत्र था. 

महमूद ने 1000 से 1027 ई. के बीच भारत पर कुल 17 आक्रमण किए. इसका विवरण निम्नलिखित है :

1. प्रथम आक्रमण (1000 ई.)- महमूद गजनवी का भारत पर प्रथम आक्रमण सीमावर्ती क्षेत्रों पर हुआ. कुछ भागों पर अधिकार करने के पश्चात वह वापस अपने देश लौट गया.

2. दूसरा आक्रमण (1001 ई.)- महमूद गजनवी का भारत पर किया गया दूसरा आक्रमण पंजाब के हिन्दूशाही  राज्य के विरुद्ध था. इस समय हिन्दूशाही वंश का शासक जयपाल शासन कर रहा था जिसने पेशावर के समीप महमूद गजनवी का मुकाबला किया. इसमें जयपाल की पराजय हुई और उसे बन्दी बना लिया गया. जयपाल ने बहुत धन देकर अपने को मुक्त कराया लेकिन इस पराजय को वह सहन नहीं कर सका और आत्महत्या कर ली. जयपाल के बाद आनन्दपाल गद्दी पर आसीन हुआ. हिन्दूशाही शासकों ने महमूद का कड़ाई से प्रतिरोध किया था. हिन्दूशाही राज्य की राजधानी वैहिन्द थी.

3. तीसरा आक्रमण (1004 ई.)- महमूद गजनवी का भारत पर तीसरा आक्रमण भेजा (वर्तमान उच्छ) के राजा बजरा के विरुद्ध था. 

4. चौथा आक्रमण (1005 ई.)- महमूद का चौथा आक्रमण मुल्तान पर हुआ. उस समय मुल्तान में सिया सम्प्रदाय का शासक फतह दाऊद शासन कर रहा था जिसने आक्रमण से बचने हेतु हिन्दूशाही शासक आनन्दपाल से सहायता मांगी. आनन्दपाल द्वारा यद्यपि भेरा के समीप महमूद का मुकाबला किया गया, तथापि उसकी पराजय हुई. फतह दाऊद ने भी आत्मसमर्पण कर दिया. इस तरह मुल्तान पर महमूद का अधिकार हो गया. महमूद ने आनन्दपाल के पुत्र सुखपाल को यहां का शासक नियुक्त किया. सुखपाल ने अपना धर्म परिवर्तन कर इस्लाम ग्रहण कर लिया था.

5. महमूद गजनवी का पाँचवा आक्रमण- सुखपाल ने शासक बनने के पश्चात पुनः हिन्दू धर्म अपना लिया था. यह आक्रमण सुखपाल को दण्डित करने के लिए किया गया था.

6. छठा आक्रमण (1008 ई.)- महमूद गजनवी का भारत पर किया गया छठा आक्रमण आनन्दपाल के विरुद्ध था. आनन्दपाल ने महमूद के आक्रमण का मुकाबला करने के लिए परमार, कच्छवाहा, कलचुरी, चौहान तथा राठौर राजाओं का एक संघ बनाया. पंजाब के खोखरों ने भी इसमें आनन्दपाल की सहायता की थी. पेशावर के पास निर्णायक मुकाबला लड़ा गया. खोखरों द्वारा दमदार प्रहार किया गया और इस मजबूत संघ के मुकाबले से विचलित होकर महमूद पीछे हटने को सोचने लगा. लेकिन दुर्भाग्य से आनन्दपाल के हाथी मैदान से भागने लगे और अन्तत: महमूद की जीत हुई. 

7. सातवां आक्रमण (1009 ई.)- महमूद गजनवी को आनन्दपाल के विरुद्ध किए गए आक्रमण में कोई विशेष धन नहीं मिला था. अतः यह आक्रमण नागरकोट पर किया गया. इस आक्रमण से महमूद को अकूत धन-सम्पति प्राप्त हुई.

8. आठवां आक्रमण (1010 ई.)-  महमूद का यह मुल्तान पर दोबारा आक्रमण था.

9. नौवां आक्रमण (1011-1012 ई. )- यह आक्रमण थानेश्वर के चक्रस्वामी मंदिर पर किया गया था.

10. दसवां आक्रमण (1012 ई. )- यह आक्रमण हिन्दूशाही शासक त्रिलोचनपाल पर किया गया था. त्रिलोचनपाल आनन्दपाल का पुत्र था.त्रिलोचनपाल का पुत्र भीमपाल था जिसने महमूद का विरोध करने की नीति अपनाई थी. 1026में भीम की मृत्यु के बाद शाहीवंश समाप्त हो गया.

11. ग्यारहवां आक्रमण(1015-1016 ई.)-  इस आक्रमण के द्वारा महमूद कश्मीर प्रवेश करना चाहता था, परन्तु भौगोलिक बाधाओं ने उसे विवश किया .

12. बारहवां आक्रमण (1018ई.)- यह आक्रमण कन्नौज पर किया गया था. इस आक्रमण से महमूद पहली बार गंगा घाटी में प्रवेश किया. महमूद ने कन्नौज पर अधिकार कर लिया. कन्नौज पर आक्रमण के क्रम में महमूद ने मन्दिरों की नगरी मथुरा पर अधिकार कर लिया व मथुरा को जमकर लूटा. इस लूट में उसे अकूत सम्पत्ति प्राप्त हुई.

13. तेरहवां आक्रमण (1019)- मथुरा के बाद महमूद ने वृन्दावन को भी लूटा. यहां अपार धन प्राप्त करने के पश्चात कन्नौज पर चढ़ाई की जहां
गुर्जर-प्रतिहार वंशीय अन्तिम शासक राज्यपाल शासन कर रहा था. राज्यपाल भयभीत होकर बगैर युद्ध किए भाग गया. इस प्रकार महमूद गजनवी ने कन्नौज को जमकर लूटा और लोगों को मौत के घाट उतारा.

14. चौदहवां आक्रमण (1019-1022)- चन्देल शासक विद्याधर के आदेश पर राज्यपाल की हत्या कर दी.
कन्नौज विजय के पश्चात महमूद गजनवी वापस गजनी लौट गया था,
लेकिन जब उसे इस बात की जानकारी हुई कि विद्याधर ने राज्यपाल की इसलिए हत्या करवा दी क्योंकि वह बगैर युद्ध किए भाग गया था तो उसने विद्याधर को दण्डित करने के लिए यह आक्रमण किया. यह युद्ध अनिर्णीत रहा और महमूद ने 1022 ई. में पुनः विद्याधर पर आक्रमण किया.

15. पन्द्रहवां आक्रमण (1021-1022)
इस आक्रमण के द्वारा महमूद ने पंजाब पर अधिकार कर लिया और अरियारूक को गवर्नर नियुक्त किया.

16. महमूद गजनवी का सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण (सोमनाथ की लूट)



सोमनाथ मंदिर, गुजरात


1025-1026 मे महमूद गजनवी का सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण हुआ. यह महमूद गजनवी का भारत पर सर्वाधिक महत्वपूर्ण आक्रमण था. गुजरात के सोमनाथ मंदिर [शिव मंदिर] की अतुल धन-संपत्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से महमूद ने 1025 में अन्हिलवाड़ पर आक्रमण किया. चौलुक्य शासक भीम राजधानी छोड़कर अन्यत्र चला गया.  बगैर किसी प्रतिरोध के महमूद ने अन्हिलवाड़ को जमकर लूटा. तत्पश्चात वह सोमनाथ पहुँच गया और एक संघर्ष के बाद मंदिर पर कब्जा कर लिया. इस लूट में महमूद गजनवी को अकूत धन-संपत्ति प्राप्त हुई. सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया. इस समय तक भीम भी युद्ध की तैयारी कर चुका था और रास्ते में युद्ध के लिए तैयार खड़ा था. अतः महमूद अपना मार्ग बदलते हुए सिन्ध के रेगिस्तान से वापस लौटा. रास्ते में जाटों द्वारा उसे बहुत हानि पहुँचई गई.


17. महमूद गजनवी का अन्तिम यानी सत्रहवां आक्रमण [गजनवी और जाट][1027]

सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण और लूट के बाद जब महमूद गजनवी गजनी वापस लौट रहा था तो रास्ते में महमूद गजनवी को जाटों द्वारा बहुुत हानि
पहुँचाई गई. अतः जाटों से प्रतिशोध लेने के लिए महमूद ने 1027 ई. में खोखरों और जाटों को
परास्त किया. यह महमूद गजनवी का भारत पर किया गया अन्तिम आक्रमण था.

[महमूद गजनवी की मृत्यु]
1030 ई. में महमूद गजनवी की मृत्यु हो गई.


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