मुगल काल में स्थापत्य कला एवं वास्तुकला का विकास

मुगलकालीन स्थापत्य कला अथवा वास्तुकला। विशेषताएँ। भारत - फारसी वास्तुकला। इंडो-सारसेनिक। इंडो-पर्शियन स्थापत्य शैली। पित्रादुरा। 

मुग़ल शासन काल में स्थापत्य कला। वास्तुकला का विकास 

मुगलकालीन स्थापत्य कला अथवा वास्तुकला के इतिहास का प्रारम्भ मुगल वंश के संस्थापक बाबर से होता है, जो बाद के कालों में अकबर, जहाँगीर व शाहजहाँ के काल में अपने चरम पर पहुँचा. शाहजहाँ का काल भारतीय इतिहास में स्थापत्य अथवा वास्तुकला के स्वर्णकाल के रूप में जाना जाता है.

मुगल स्थापत्य कला की मुख्य विशेषता यह थी कि मुगलों ने विभिन्न स्थानीय अथवा क्षेत्रीय शैलियों का एकीकरण किया और इसमें ईरानी शैली की नई विशेषताओं का समावेश कर दिया. इस घाल-मेल के फलस्वरूप एक नई शैली का विकास हुआ. इस नई शैली को विभिन्न विद्वानों ने मुगल स्थापत्य शैली, इंडो-पर्शियन शैली  अर्थात भारत - फारसी वास्तुकला तथा इंडो-सरासेनिक शैली  ( Indo  - Saracenic ) का नाम दिया है.



मुगल शासकों का भवन निर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान व विशिष्ट स्थान है. उन्होंने शानदार किले, प्रासाद एवं द्वार बनवाने के साथ-साथ मस्जिद, सराय, हमाम आदि सार्वजनिक निर्माण से संबंधित कार्य भी किए.

बाबरकालीन स्थापत्य अथवा वास्तुकला, इमारतें, महलें आदि


मुगल सम्राट बाबर का सौंदर्य-बोध उत्कृष्ट था. एक उच्च कोटि के विद्वान होने के साथ-साथ बाबर  एक कलाप्रेमी भी था. इतिहासकार सतीश चन्द्र लिखते हैं कि बाबर के लिए स्थापत्य का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नियम-निष्ठता एवं समरूपता थी, जो उसे भारतीय इमारतों में दिखाई नहीं दी.बाबर भारतीय कलाकारों के साथ काम करने के लिए उत्सुक था. इस कार्य हेतु उसने अलबानियाई प्रसिद्ध कलाकार ' सिनान ' के शिष्यों को बुलाया. बाबर को भारत में स्थापत्य के क्षेत्र में ज्यादा कुछ करने का समय नहीं मिला और उसने जो कुछ बनवाया भी उसमें अधिकतर अब नष्ट हो चुके हैं.

चार बाग  बनवाने की पद्धति व जलप्रवाह की व्यवस्था की ईरानी पद्धति का प्रयोग बाबर ने भारत में किया. बाबर ने ऐसे कई बगीचे बनवाए जिनमें सतत जलप्रवाह होता रहता था. बाबर बगीचों का शौकीन था. उसके द्वारा बनवाए गए कुछ बगीचे निम्नलिखित हैं :

1. निशात बाग [कश्मीर]
2. शालीमार बाग [लाहौर]
3. पिंजौर बाग
4. आराम बाग [आगरा के निकट] [ इसे अब रामबाग कहा जाता है]
ज्यामितीय विधि पर आधारित आगरा में बाबर द्वारा निर्मित उद्यान को ' नर अफगान ' नाम दिया गया है.

बाबर द्वारा निर्मित इमारतें

1. पानीपत के निकट काबुली मस्जिद [1529]
2. रूहेलखण्ड में सम्भल की ' जामी मस्जिद ' 

हुमायूँकालीन स्थापत्य कला

यद्यपि अपने पिता की भाँति हुमायूं भी कलाप्रेमी था, तथापि राजनीतिक जीवन में वह हमेशा अस्त-व्यस्त ही रहा. इस कारण उसकी कलात्मक अभिरुचि की अभिव्यक्ति नहीं हो पाई. अपने निर्वासन काल में ईरान में उसका ईरानी स्थापत्य से परिचय हुआ और वह जब वह भारत लौटा तो अपने साथ ईरानी वास्तुकला को भी लाया. यद्यपि वह इस कला को विकसित ना कर सका, तथापि उसके उत्त्तराधिकारियों ने इसे शीर्ष पर पहुँचाया.


हुमायूँ द्वारा निर्मित इमारतें, महल आदि


1. दीनपनाह - दिल्ली [1533 में निर्मित][विश्व का शरण स्थल]
इसे पुराना किला के नाम से भी जाना जाता है.

2. आगरा तथा फतेहाबाद में दो मस्जिदों का निर्माण
फतेहाबाद [ हिसार के समीप ] का मस्जिद फारसी शैली में निर्मित है.

शेरशाहकालीन स्थापत्य कला


शेरशाह भारत में द्वितीय अफगान साम्राज्य का संस्थापक था. मुगलों का अनुसरण करते हुए शेरशाह ने भी कुछ भवनों का निर्माण करवाया. ये निम्नलिखित हैं :

1. दिल्ली में ' शेरगढ़ ' नामक नगर का निर्माण.
इसे  ' दिल्ली शेरशाही ' एवं ' छठा दिल्ली ' भी कहा जाता है. वर्तमान में इसके अवशेष 'लाल दरवाजा' एवं ' खूनी दरवाजा ' सुरक्षित हैं.

2. किला-ए-कुहना मस्जिद [ 1542 में दिल्ली के पुराने किले के अन्दर निर्मित]

3. शेरशाह का मकबरा


Shershah ka makbara [Tomb]


शेरशाह की सर्वाधिक प्रसिद्ध स्थापत्य कृति सासाराम [ बिहार] में एक झील के बीच में स्थित उसका मकबरा. शेरशाह का मकबरा एक ऊंचे समकोण चबूतरे पर बनाई गई है. इस मकबरे में भारतीय व इस्लामी स्थापत्य कला का सुन्दर समन्वय देखने को मिलता है. पर्सी ब्राउन के शब्दों में, 'इसका प्रतिबिंब चलनशीलता का आभास देते हुए पूरी इमारत का अक्स उतार कर [पानी में प्रतिबिंब] उसके आकार की वृद्धि [दुगना] कर देता है. शेरशाह के मकबरे के बहुत सी विशेषताएँ कुछ संशोधनों सहित 'ताजमहल 'में देखी जा सकती हैं. यह मकबरा मजबूती अर्थात ठोसपन का प्रभाव छोड़ता है जो वास्तुकला की एक प्रमुख विशेषता है. इस प्रकार यह शेरशाह के चरित्र को सटीक अभिव्यक्ति भी देता है.

अकबरकालीन स्थापत्य अथवा वास्तुकला


विद्वनों के अनुसार मुगल स्थापत्य अथवा वास्तुकला का वास्तविक आरंभ अकबर से होता है. अकबर का काल कई दृष्टिकोण से नवीन प्रयोंगों का काल माना जाता है. यह प्रयोग स्थापत्य कला अथवा शैली के क्षेत्र में भी दृष्टिगोचर होता है. अबुल फजल लिखता है कि " बादशाह सुन्दर भवनों की योजना बनाता है और अपने मस्तिष्क एवं हृदय के विचारों को पत्थर और गारे का रूप प्रदान करता है. अकबर की यह विशेषता थी कि वह ना सिर्फ निर्माण कार्य की देख-रेख करता था, बल्कि कभी-कभी तो वह उसमें हाथ भी बटाता था.

हुमायूँ का मकबरा

अकबरकालीन स्थापत्य कला की मुख्य विशेषता यह थी कि उसके काल में वास्तुकला की दो परंपराएं साथ-साथ काम कर रही थी. एक ईरानी परंपर, जो हुमायूँ अपने निर्वासन के बाद भारत लौटते समय अपने साथ लाया था. यह परंपरा हुमायूँ के मकबरे में अभिव्यक्त हुई है जिसे उसके विधवा हाजी बेगम ने बनवाया था. इसे पूरा होने में आठ साल का वक्त लगा था. इस मकबरे का नक्काशी फारसी शिल्पकार मिर्जा ग्यास द्वारा तैयार किया गया था. यह मकबरा अकबरकालीन स्थापत्य का पहला नमूना है.

हुमायूँ के मकबरे की मुख्य विशेषताएँ


क. ईरानी वास्तुकला की विशेषता दोहरी गुम्बद है जिसे सिकन्दर लोदी के मकबरे में इस्तेमाल किया गया था, परन्तु अभी तक इसने परिपक्वता को प्राप्त नहीं किया था. इस प्रकार हुमायूं के मकबरे को दोहरी गुम्बद वाला भारत का पहला मकबरा माना जाता है.

ख. यह मकबरा ज्यामितीय चतुर्भुज आकार के बने उद्यान के मध्य एक ऊँचे चबूतरे पर स्थित है.

ग. चारबाग पद्धति से बना यह मकबरा मुगल काल का प्रथम स्थापत्य स्मारक

ग. स्वतंत्र रूप से निर्मित मीनारों का अभाव

घ. लाल बलुई पत्थर का प्रयोग और शीर्ष पर सफेद संगमरमर से बना मनभावन  गुंबद. इसके साथ ही हुमायूं के मकबरे में काले संगमरमर का भी प्रयोग हुआ है.

च. इसके चारों ओर बड़े ही नियोजित तरीके से बाग बनाए गए हैं. इनमें से मकबरे में जाने का मुख्य मार्ग जाता है. अत: इसे ताजमहल का पूर्वगामी भी कहा जाता है.

छ. हुमायूं के मकबरे की एक उल्लेखनीय बात यह है कि इनमें मुगल वंश के सर्वाधिक लोगों को दफन किया गया है. इनमें मुख्य हैं- दारा शिकोह, जहांदरशाह, हमीदाबानू बेगम, हुमायूं की छोटी बेगम, फर्रूखशियर, रफी उद्दौला, आलमगीर द्वितीय आदि.

उल्लेखनीय है कि मुगल वंश के अन्तिम शासक बहादुरशाह जफर को अंग्रेज लेफ्टिनेंट हडसन ने 1857 की क्रांति के दौरान हुमायूँ के मकबरे से ही बंदी बनाया था.

अकबर द्वारा बनाया गया महल


अकबरकालीन इमारतें


[ अकबरी शैली में आगरा का किला ]



जिस समय दिल्ली में हुमायूं का मकबरा बनवाया जा रहा था उसी समय बादशाह अकबर आगरा में अपना शानदार निर्माण कार्य करवा रहा था. आगरा का किला अकबरी शैली का प्रथम उदाहरण है. इसका निर्माण कार्य 1565 ई. में प्रारंभ हुआ और इसे बनने में आठ वर्षों का समय लगा. यमुना के दाहिने किनारे पर लगभग डेढ़ मील के दायरे में स्थित आगरा के किले का निर्माण कारीगर कासिम खां की देख-रेख में हुआ था. बाद के काल में अकबर द्वारा बनवाए गए लाहौर, अजमेर एवं इलाहाबाद के किले इसी नमूने पर आधारित था. शाहजहाँ द्वारा दिल्ली में बनवाया गया लाल किला भी इसी नमूने से प्रेरित है. इस किले के अन्दर अकबर द्वारा लगभग पाँच सौ महल बनवाए गए थे जिसका निर्माण बंगाल व गुजरात की स्थापत्य शैली पर हुआ था.




आगरा किला की मुख्य विशेषताएँ


1. आगरा के किले के निर्माण में लाल पत्थरों का भरपूर प्रयोग किया गया है. इसी कारण इसे आगरा का लाल किला भी कहते हैं.

2. आगरा के किले में प्रवेश हेतु दो द्वार हैं. मुख्य द्वार को दिल्ली दरवाजा अथवा हाथी दरवाजा के नाम से भी जाना जाता है.

3. मुख्य द्वार पर स्थित दो बुर्जों में समरूपता है. इसमें बाल्कनियों का उत्कृष्ट प्रयोग किया गया है.

4. इसके संगमरमर निर्मित मेहराबों को पशु-पक्षियों के चित्रों द्वारा सुसज्जित कर इसे चिताकर्षक रूप प्रदान किया गया है.

5. आगरा किला में स्थित जहांगीरी महल

 लाल पत्थरों से निर्मित अकबर द्वारा बनवाया गया यह वर्गाकार महल मानमंदिर [ग्वालियर के मानसिंह का महल] से प्रेरित है. इसमें गुम्बदों के बदले छतरियां प्रयुक्त हुई हैं. जहांगीरी महल हिन्दू स्थापत्य कला से साम्यता रखता है. इसके नाम से ही स्पष्ट है अकबर ने यह महल शाहजादा सलीम [जहांगीर] के निवास हेतु करवाया था.

6. अकबरी महल


अकबर द्वारा बनवाया गया यह महल भी आगरे के किले में स्थित है. इसकी कलात्मकता जहांगीरी महल की तुलना में कम प्रभावोत्पादक है.

फतेहपुर सीकरी

आगरा से लगभग तेईस मील की दूरी पर स्थित ' सीकरी ' नामक ग्राम में प्रसिद्ध सूफी सन्त शेख सलीम चिश्ती का निवास था. उनके आशीर्वाद से सीकरी में ही अकबर के पुत्र सलीम का जन्म भी हुआ था. अतः अकबर द्वारा यहां अपनी नई राजधानी की नींव रखी गई थी. यद्यपि सीकरी का निर्माण कार्य 1568-1569 में ही आरंभ हुआ, तथापि 1572 में गुजरात विजय के बाद इसे फतेहपुर सीकरी कहा जाने लगा. फतेहपुर सीकरी का शाब्दिक आशय विजय नगरी' से है. यह पूरी तरह 1585 तक बनकर तैयार हुआ जिसके निर्माण का श्रेय वहाउद्दीन को प्राप्त है. अकबर द्वारा यहां बहुत सारे महलें व इमारतों का निर्माण करवाया गया, जिनमें प्रमुख निम्नवत् हैं :-

1. दीवान-ए-आम 
बादशाह अकबर यहां अपना दरबार लगाया जाता था. दीवान-ए-आम एक कुर्सी पर निर्मित है.

2. दीवान-ए-खास

अकबरकालीन यह इमारत दीवान-ए-खास दीवान-ए-आम के पीछे दाहिने तरफ स्थित था. नई रिसर्च के आधार पर यह सोने, चांदी व तांबे के खजाने का भाग माना जाता है. पास में ही एक जगह है जिसे आंख-मिचौली कहते हैं. दीवान-ए-खास में ही अकबर का प्रसिद्ध इबादतखाना स्थित था जहां प्रत्येक शुक्रवार के दिन विभिन्न धर्मों के विद्वानों का विचार-विमर्श होता था. दीवान-ए-खास में सिंहासन स्तम्भ की शुरुआत एक नई चीज थी. यह सिंहासन स्तम्भ बौद्ध व हिन्दू वास्तुकला से प्रेरित प्रतीत होता है.

3. पंचमहल -यह एक पंच मंजिला इमारत है.

4. तुर्की सुल्ताना का महल- पर्सी ब्राउन ने इसे स्थापत्य कला का मोती कहा है.

5. खास महल

6. जोधाबाई का महल

7. मारियम का महल- मरियम महल से मुगलकालीन चित्रकला पर   प्रकाश पड़ता है.
8. बीरबल का महल

9. शाही अस्तबल

10. सराय - अकबर द्वारा यात्रियों के ठहरने हेतु सरायों का भी निर्माण करवाया गया. सराय छोटे नगरों व गांवों में बनाए जाते थे. आगरा के समीप नूरमहल सराय महत्वपूर्ण है.

11.हिरन मीनार- यह एक वृत्ताकार मीनार है जो 90 फीट ऊँची है.

12. जामा मस्जिद - इसे जामी मस्जिद भी कहते हैं. अकबर द्वारा दीन-ए-इलाही की घोषणा यहीं से की गई थी.

13. बुलंद दरवाजा

इसका निर्माण अकबर ने गुजरात विजय की स्मृति में 1573 में आरंभ करवाया था. इसे फतेहपुर सीकरी का गौरव भी कहते हैं.
14. शेख सलीम चिश्ती का मकबरा
15. इस्लाम खां का मकबरा
16. नौ महला
17. अनूप तालाब

जहांगीरकालीन स्थापत्य अथवा वास्तुकला [पित्रा-दुरा आदि PIETRA-DURA]

साम्राज्यिक सुदृढ़ीकरण के साथ ही मुगल स्थापत्य अपनी चरम परिणति को प्राप्त हुआ. जहांगीर के शासनकाल के अन्तिम दौर में संगमरमर की इमारतें बनवाने व इसकी दीवारों को कीमती रत्नों एवं पत्थरों से सजाने जैसा कार्य प्रारम्भ हुआ. इसे पितरादुरा   [Pietra - Dura ] कहते थे. जहाँगीर के शासनकाल में आगरा में निर्मित ' एत्मादुद्दौला का मकबरा' इसी पीत्रा-दुरा शैली से सजाया गया है

अकबर का मकबरा [सिकन्दरा]
यद्यपि जहाँगीर को स्थापत्य कला की तुलना में चित्रकला में अधिक रूचि थी और जहाँगीर के काल में ही मुगलकालीन चित्रकला अपने उत्कर्ष पर पहुँची, तथापि  जहाँगीर के शासनकाल में भी स्थापत्य के क्षेत्र में कुछ उ त्कृष्ट काम हुुए. आगरा के निकट
सिकन्दरा में अकबर का मकबरा स्थित है. इस मकबरे की योजना अकबर ने स्वयं ही बनाई थी. अकबर का मकबरा पांच मंजिला है और इसमें पहली मंजिल पर अकबर की कब्र है. यह मकबरा बौद्ध वास्तुकला से प्रभाव छोड़ता है और इसका भीतरी भाग इस्लामी, हिन्दू व ईसाई प्रभाव दिखाता है. अकबर के मकबरे में ईश्वर के निन्यानवे नामों के साथ ही हिन्दुओं का स्वास्तिक चिह्न, ईसाई क्रास व अल्लाह अकबर तथा जल्ले जलालहू अंकित है.

जहांगीर का मकबरा [शहादरा,लाहौर]
जहाँगीर काल की तीसरी प्रमुख इमारत है लाहौर में रावी नदी तट पर शहादरा में स्थित उसका स्वयं का मकबरा. जहाँगीर का मकबरा वर्गाकार आकृति का है जिसकी योजना जहाँगीर ने स्वयं तैयार की थी, लेकिन इसे पूरा करने का कार्य नूरजहाँ ने किया था.

जहाँगीरकालीन अन्य प्रमुख इमारत हैं :
1. मोती मस्जिद [लाहौर]
2. अनारकली का मकबरा
3. जहाँगीर ने कश्मीर में प्रसिद्ध शालीमार बाग की स्थापना की थी.

शाहजहांकालीन स्थापत्य अथवा वास्तुकला

शाहजहाँ का काल मुगल स्थापत्य का स्वर्ण - काल था. शाहजहाँ का स्थापत्य कला अथवा वास्तुकला के प्रति गहरा लगाव था. शाहजहाँ ने निर्माण संबंधी कार्य हेतु सार्वजनिक निर्माण विभाग की स्थापना की. यह काल मुगल स्थापत्य कला का स्वर्ण युग होने के साथ ही मुगल वास्तुकला के इतिहास का अंतिम चरण भी था.

शाहजहांकालीन स्थापत्य का प्रमुख विशेषताएँ थीं- नक्काशीयुक्त दांतेदार मेहराब, बंग्ला शैली के कंगूरे, कीमती रंगीन पत्थरों का शानदार प्रयोग, दोहरा गुम्बद अपेक्षाकृत ऊंचा उठा हुआ आदि.
शाहजहाँ के काल में भवनों में कुछ परिवर्तन भी दृष्टिगोचर होते हैं जब हम आयताकार महलों के स्थान पर वृत्ताकार महलों को देखते हैं.

शाहजहाँ द्वारा आगरा में बनवाया गया प्रमुख महल, इमारत आदि
ताजमहल, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, शीश महल, चमेली महल, अंगूरी बाग व मोती मस्जिद आदि

शाहजहां द्वारा दिल्ली में बनवाया गया प्रमुख इमारतें, महल आदि
लाल किला, जामा मस्जिद, दीवान-ए-आम, खास महल व रंग महल आदि






ताजमहल [TAJMAHAL]

TAJMAHAL [AGRA]




ताजमहल भारत में शाही स्थापत्य के विकास की तार्किक परिणति है. इस तथ्य में दम नहीं है कि इसकी रूपरेखा एक इतालवी जेरोनीमो वेरोनियो द्वारा तैयार की गई थी. विश्व के अति उत्कृष्ट इमारतों में से एक ताजमहल का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल की स्मृति में करवाया था. इस प्रकार ताजमहल को एक ' वफादार आशिक का खिराज' व साहित्यिक रूप में ' संगमरमर में संवेदनशील शोकगीत' आदि के रूप में उल्लेखित किया जाता है. इसके मुख्य वास्तुकारों में उस्ताद अहमद लाहौरी तथा प्रधान मिस्त्री फारस का उस्ताद ईसा एफेंदी का नाम लिया जाता है. इसके साथ ही अन्य कई सहायक कारीगरों ने, जो वास्तुकला के क्षेत्र में पारंगत थे; ताजमहल को मूर्त रूप देने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया. यह भव्य इमारत 1631 में बनना प्रारंभ हुआ और 1653 में अर्थात कुल 22 वर्षों में पूरी तरह बनकर तैयार हुआ. इसके निर्माण में लगभग 3 करोड़ रूपये का खर्च आया था.

ताजमहल के निर्माण की तफसीलें बयां करने वाली एक पाण्डुलिपि के अनुसार, शाहजहाँ ने इस निर्माण से संबंधित सलाह के लिए विशेषज्ञों की एक समिति नियुक्त की थी. वास्तुकारों ने इसके नमूने कागज पर उत्कीर्ण कर बादशाह के समक्ष प्रस्तुत की. शाहजहाँ की इस मकबरे से संबंधित अपनी भी कुछ मौलिक कल्पनाएं थीं. अतः उसने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए और इन तमाम योजनाओं के आधार पर लकड़ी निर्मित कई नमूने तैयार किए गए. अंतिम रूप से तैयार किए गए नमूने के आधार पर ताजमहल का निर्माण किया गया. इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि इसका कोई अकेला डिजाइनकर्ता नहीं था, बल्कि इसके निर्माण में कई वास्तुविदों का सामूहिक योगदान है.

शाहजहाँ के काल में मस्जिद निर्माण भी अपने चरम पर पहुँचा. इनमें दो उल्लेखनीय मस्जिद हैं- दिल्लीकी जामा मस्जिद और आगरा की मोती मस्जिद. मोती मस्जिद ताज की तरह ही संगमरमर की बनी हुई है, जबकि दिल्ली की जामा मस्जिद में लाल रंग के बलुई पत्थर का प्रयोग किया गया है. ऊंचा सिंहद्वार व पतली मीनारें तथा गुंबद की अधिकता जामा मस्जिद की प्रमुख विशेषताएँ हैं.

लाल किला [दिल्ली]
मुगलों द्वारा निर्मित यह अंतिम किला था. दिल्ली का लाल किला लगभग 9 वर्षों में बनकर तैयार हुआ. लाल किला मेहराबदारदार व शहतीरदार - दोनों शैलियों का एक सुन्दर संगम है. इसके निर्माण कार्य में करीब 1 करोड़ रूपये का खर्च आया था. दिल्ली का लाल किला हमीद अहमद नामक शिल्पकार की देख-रेख में वर्ष 1648 में पूर्ण हुआ था.

दीवान-ए-आम
दिल्ली के लाल किले में निर्मित दीवान-ए-आम की विशेषता इसके पिछले दीवार में बना एक प्रकोष्ठ था, जहां " तख्ते-ताउस " रखा जाता था. बादशाह शाहजहाँ इसी तख्ते-ताउस पर बैठता था. तख्ते-ताउस का निर्माण बादल ने करवाया था. बाद के काल में नादिरशाह का भारत पर आक्रमण के समय वह 'तख्ते-ताउस' एवं 'कोहिनूर-हीरा' लेकर चला गया.

औरंगजेब द्वारा बनवाया गया महल, इमारत
औरंगजेब का काल मुगल स्थापत्य कला के पतन का काल था. औरंगजेब मित्व्ययी था, फिर भी उसके द्वारा कुछ निर्माण कार्य करवाए गए, हालाँकि वास्तुकला की उत्कृष्टता के लिहाज से ये निम्न कोटि के हैं. उसके द्वारा बनवाए गए कुछ भवन निम्नलिखित हैं :




बीबी का मकबरा
यह औरंगाबाद में स्थित उसकी प्रिय पत्नी रबिया-उद-दौरानी का मकबरा है. 1678 ई. में निर्मित इस मकबरे को ताजमहल की नकल मानते हुए 'दक्षिण का ताजमहल ' की संज्ञा भी दी जाती है.

मोती मस्जिद [दिल्ली]
लाल किले के भीतर इस मस्जिद का निर्माण औरंगजेब ने संगमरमर से करवाया था.
इसके अतिरिक्त औरंगजेब ने 1674 में फिदाई खाँ की देख-रेख में लाहौर में बादशाही मस्जिद भी बनवाया था.

मुगलकालीन इमारतें / इमारतों की सूची 



 क्रम संख्या 
 इमारत / भवन 
स्थान 
शासक 
1.
काबुली बाग़ की मस्जिद 
पानीपत  
बाबर  
2.
दीनपनाह  
दिल्ली  
हुमायूँ  
3.
किला-ए-कुहना  
दिल्ली  
शेरशाह  
4. 
शेरशाह का मकबरा  
सासाराम  
शेरशाह  
5. 
हुमायूँ का मकबरा  
दिल्ली  
हाजी बेगम  
6. 
आगरा का किला  
आगरा  
अकबर  
7. 
जहांगीर महल  
आगरा  
अकबर  
8.
अकबरी महल  
आगरा  
अकबर  
9. 
पंच महल  
फतेहपुर सीकरी 
अकबर  
10. 
तुर्की सुल्ताना का महल  
फतेहपुर सीकरी  
अकबर  
11. 
मरियम महल  
फतेहपुर सीकरी  
अकबर  
12.
बुलंद दरवाजा  
फतेहपुर सीकरी  
अकबर  
13. 
शेख सलीम चिश्ती का मकबरा  
फतेहपुर सीकरी  
अकबर  
14.
लाहौर का किला  
लाहौर  
अकबर  
15.
इलाहबाद का चालीस स्तम्भों वाला किला  
इलाहबाद  
अकबर  
16. 
अकबर का मकबरा  
सिकंदरा  
जहांगीर  
17. 
एत्मादुद्दौला का मकबरा 
आगरा  
नूरजहां  
18.
जहांगीर का मकबरा  
शाहदरा  
नूरजहाँ  
19.
शाह बुर्ज  
आगरा  
शाहजहां  
20.
लाल किला  
दिल्ली  
शाहजहां  
21. 
जामा - मस्जिद  
दिल्ली  
शाहजहां  
22.
दीवान-ए-खास  
दिल्ली  
शाहजहां  
23. 
मोती मस्जिद  
आगरा  
शाहजहां  
24. 
ताजमहल  
आगरा  
शाहजहां  
25. 
मोती मस्जिद  
दिल्ली  
औरंगजेब  
26. 
बीबी का मकबरा  
औरंगाबाद  
औरंगजेब  
27. 
बादशाही मस्जिद 
लाहौर 
औरंगजेब 


कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.