मुगलकालीन संगीत कला

मुगलों के शासनकाल में संगीत कला का अच्छा विकास हुआ. मुगल शासकों ने संगीतकारों को संरक्षण प्रदान किया और इस प्रकार मुगल काल में कई लोकप्रिय संगीतकारों अथवा गायकों को अपनी प्रतिभा एवं कला निखारने का समुचित अवसर मिला. बाबर एवं हुमायूँ- दोनों संगीत प्रेमी थे, लेकिन इनके अल्प शासनकाल में इन्हें संगीत कला लिए बहुत ज्यादा करने का अवसर नहीं मिला. इस तरह अकबर के शासनकाल में संगीत कला का अच्छा विकास हुआ.

मुगल संगीत कला एवं संगीतकार

Mugalkalin Sangeet Kala

अबुल फजल के अनुसार, अकबर के दरबार में 36 गायकों को संरक्षण प्राप्त था. उनमें सर्वाधिक प्रसिद्ध संगीतकार तानसेन था. अकबर ने तानसेन को 'कण्ठाभरणवाणी विलास' की उपाधि प्रदान की थी. अकबर के दरबार में आने से पहले तानसेन रीवा के राजा रामचन्द्र के दरबार में थे. अबुल फजल कहता है कि तानसेन के समान गायक पिछले हजार वर्षों में भारत में नहीं हुआ. अकबर स्वयं भी नगाड़ा बजाने में निपुण था. तानसेन ने मियां की मल्हाड़मल्हाड़ मियांड़ी, मियां की सारंग व दरबारी कन्हरा नामक रागों का सृजन किया. तानसेन अकबर के दरबार के नवरत्नों में एक था.

अकबर के काल में ' ध्रुपद गायन ' की चार शैलियाँ प्रचलित थीं. ये चार शैलियाँ थीं- नोहर वाणी, खण्डार वाणी, गोवरहारी या गौरारी वाणी एवं डागुर वाणी. बाद के काल में ध्रुपद गायन का स्थान ' ख्याल गायन ' ने ले लिया.

तानसेन के बाद मालवा का पूर्व शासक बाजबहादुर  अकबर के दरबार का प्रमुख संगीतकार था, जिसे दो हजार का मनसब प्रदान किया गया था. अबुल फजल लिखता है कि बाजबहादुर संगीत विद्वान एवं हिन्दी गीतों में अपने समय का प्रसिद्ध व्यक्ति था.

मुगल शासक जहाँगीर भी अपने पिता के समान ही संगीत प्रेमी था. संगीत कला को प्रस्रय देते हुए उसने संगीतकारों को शाही मनसबदारों की श्रेणी में रखा. उसने स्वयं भी कई हिन्दी गीतों की रचना की थी. जहाँगीर के दरबार में प्रमुख संगीतकार थे- जगन्नाथ एवं जनार्दन भट्ट. गौकी नामक एक गजल गायक को जहाँगीर ने 'आनन्द खां' की उपाधि प्रदान की थी.

शाहजहाँ में भी संगीत से दिलचस्पी थी. उसका प्रिय राग ध्रुपद था. शाहजहाँ स्वयं भी गायन करता था. शाहजहाँ के काल के प्रमुख संगीतकार थे- लाल खां, खुशहाल खां, बिसराम खां.

औरंगजेब संगीत को इस्लाम विरुद्ध मानता था और इस कारण उसने संगीत को निषेध कर दिया. परिणामस्वरूप औरंगजेब के कालमें संगीत का विकास बाधित हुआ. औरंगजेब के संबंध में एक तथ्य यह भी है कि आरंभिक दस वर्षों में उसे संगीत से दिलचस्पी थी. उसके दरबार में बहुत से संगीतज्ञ थे, जिनमें प्रमुख थे- रसबैन खाँ, हयात सरनैन, सुखसेन, कलावन्त एवं किरपा आदि.

औरंगजेब एक कुशल वीणावादक था और यह भी एक तथ्य है कि उसी के काल में भारतीय शास्त्रीय संगीत पर फारसी भाषा में सर्वाधिक पुस्तकें लिखी गईं. फकीरूल्लाह ने 'मान कुतूहल'  का अनुवाद 'रागदर्पण' नाम से करके औरंगजेब को समर्पित किया.

उत्तरवर्ती मुगल शासकों में मुहम्मदशाह के काल में संगीत कला का उल्लेखनीय विकास हुआ. मुहम्मद शाह संगीत का महान संरक्षक था. वह स्वयं भी एक प्रसिद्ध गायक था और 'रंगीला पिया' के उपनाम से उसने ख्यालों की रचनाएँ भी की थी. नेमत खां, सदारंग एवं अदारंग मुहम्मद शाह के दरबार के प्रसिद्ध संगीतकार थे जिन्होंने संगीत कला के विकास को पराकाष्ठा पर पहुँचा दिया.


मुगल काल के प्रमुख संगीतकार व उनके आश्रयदाता 

1. तानसेन- अकबर

2. बाजबहादुर - अकबर

3. बैजबख्श - अकबर

4. गोपाल - अकबर

5. हरिदास - अकबर

6. रामदास - अकबर

7. सुजान खां - अकबर

8. मियाँ चाँद - अकबर

9. मियाँ लाल - अकबर

10. विलास खाँ - जहाँगीर

11. छतर खाँ - जहाँगीर

12. हमजान - जहाँगीर

13. जगन्नाथ - जहाँगीर

14. जनार्दन भट्ट - जहाँगीर

15. गौकी [ आनन्द खाँ ] - जहाँगीर

16. लाल खाँ [ गुणसमुन्दर ] - शाहजहाँ

17. खुशहाल खाँ - शाहजहाँ

18. बिसराम खाँ - शाहजहाँ

19. नेमत खाँ - मुहम्मद शाह

20. सदारंग - मुहम्मद शाह

21. अदारंग - मुहम्मद शाह

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