वेलेजली की सहायक संधि - Subsidiary Alliance in hindi

Lord Wellesely Subsidiary Alliance System In Hindi. सहायक संधि क्या थी ? सहायक संधि की शर्तें क्या थी ? सहायक संधि का अँग्रेजों के लिए क्या लाभ था ? सहायक संधि पर हस्ताक्षर करने वाले पहला भारतीय राज्य कौन था ? इन सभी सवालों का जवाब हम नीचे के प्रश्नोत्तर में पाएँगे.
वेलेजली की सहायक संधि (Subsidiary Alliance)
(नोट: सहायक संधि का प्रयोग भारत में वेलेजली से पूर्व फ्रांसीसी गवर्नर (French governor) डूप्ले द्वारा किया गया था. इसलिए लार्ड वेलेजली को सहायक संधि प्रणाली का आविष्कारक या जन्मदाता नहीं कह सकते.)

लार्ड वेलेजली (Lord Wellesely) की 'सहायक संधि प्रणाली' (Subsidiary alliance system) क्या थी ? इसने किस प्रकार अंग्रेजों के साम्राज्य प्रसार में भूमिका अदा की ?

उत्तर : वेलेजली ने भारतीय राज्यों को अँगरेजी राजनीतिक परिधि में लाने के लिए सहायक संधि (Subsidiary Alliance) का प्रयोग किया. इससे अँगरेजी सत्ता की श्रेष्ठता स्थापित हो गई. सहायक संधि प्रणाली (Subsidiary Alliance System) का आधुनिक भारतीय इतिहास (Modern Indian History) में महत्वपूर्ण स्थान है. यह एक ऐसी प्रणाली थी जिससे अँगरेजी साम्राज्य को भारत का एक विस्तृत क्षेत्र हाथ लगा.
Subsidiary Alliance in Hindi

(क्या थी सहायक संधि प्रणाली ? What was Lord Wellesely Subsidiary Alliance system?)

वेलेजली की सहायक संधि प्रथा के अनुसार, किसी सहयोगी भारतीय राज्य के शासक को ब्रिटिश सेना अपने राज्य में रखना पड़ता था. इस प्रथा के अनुसार भारतीय शासक को यह भी मानना पड़ता था कि वह अपने दरबार में एक ब्रिटिश रेजीडेंट ( British Resident) रखेगा. इसके साथ ही यह भी प्रावधान था कि अंगरेजों की स्वीकृति के बिना किसी और यूरोपीय (European) को भारतीय शासक अपनी सेवा में नहीं रख सकते थे. इसके बदले इन शासकों को इनके दुश्मनों से रक्षा का वचन दिया जाता था. यद्यपि अंगरैजों ने सहयोगी राज्यों के अंदरूनी मामलों में दखल न देने का भी यद्यपि वचन दिया, परन्तु व्यवहार में शायद ही कभी इसे निभाया हो.

सहायक संधि की प्रतिबंधें एवं शर्तें - Conditions of Subsidiary Alliance System.

एक सहायक संधि (Subsidiary Alliance) प्रायः निम्नलिखित प्रतिबंधों और शर्तों (Conditions) पर होती थी :




1. भारतीय राजाओं के विदेशी संबंध कम्पनी के अधीन होंगे. वे कोई युद्ध नहीं करेंगें तथा अन्य राज्यों से बातचीत भी कंपनी के द्वारा ही होगी.

2. बड़े राज्यों को अपने यहां एक ऐसी सेना रखनी होती थी जिसकी कमान कंपनी के हाथों में होती थी. इसका उद्देश्य सार्वजनिक शान्ति (Public peace) बनाए रखना था. इसके लिए उन्हें पूर्ण प्रभुसत्तायुक्त प्रदेश कंपनी को देना था. छोटे राज्यों को कंपनी को नकद धन देना था.

3. राज्यों को अपनी राजधानी में एक ब्रिटिश रेजीडेंट (British Resident) रखना होता था.

4. राज्य कंपनी की अनुमति के बिना किसी यूरोपीय को अपनी सेवा में नहीं रख सकते थे.

5. कंपनी राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नही करेगी.

6. कंपनी राज्यों की प्रत्येक प्रकार के शत्रुओं से रक्षा करेगी.

इस प्रकार, इस सहायक संधि ने देशी राज्यों को नकारात्मक रूप से (Negatively) प्रभावित किया. इसके कारण भारतीय राजाओं का मानसिक बल कम हो गया, जिसका अन्तत: बहुत बुरा असर पड़ा. इसे निम्नलिखित रूपों में समझा जा सकता है :

1. वैदेशिक संबंधों का कंपनी के अधीन होने से भारतीय राज्यों की स्वतंत्रता जाती रही. सर टामस मुनरो के शब्दों में, "राज्यों ने अपनी स्वतंत्रता, राष्ट्रीय चरित्र और वह सबकुछ जो किसी देश को प्रतिष्ठित बनाते हैं, बेचकर सुरक्षा मोल ले ली."
2. अंगरेज रेजिडेंटों ने राज्यों के प्रशासन में अत्यधिक हस्तक्षेप करना आरंभ कर दिया.
3. सहायक संधि (Subsidiary Alliance) ने प्रत्येक निर्बल तथा उत्पीड़क राजा की रक्षा की और इस प्रकार वहां की जनता की स्थिति प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई. चूँकि राजा को अब अपनी जनता की स्थिति के विषय में सोचना नहीं था, इसलिए अब जनता के हित उपेक्षित होने लगे.
4. सहायक संधि प्रणाली (Subsidiary Alliance System) को अपनाने वाले राज्य शीघ्र ही दिवालिया हो गए. कंपनी द्वारा राज्य की आय का प्राय: 1/3 भाग आर्थिक सहायता के रूप में लिया जाता था. यह राशि इतनी अधिक होती थी कि लगभग सभी राज्यों पर बकाया (Arrears) रह जाता था.

सहायक संधि प्रणाली अँगरेजों के लिए किस प्रकार लाभदायक थी ? How subsidiary alliance system was beneficial for Englishman ?

अँगरेजों के लिए Subsidiary Alliance के निम्नलिखित लाभ थे :
1. अब वे भारतीय राज्य की खर्चों पर अपनी सेना रख सकते थे. अब वे अपने खुद के क्षेत्र से बहुत दूर लड़ाइयां लड़ सकते थे.
2. वे अपने सुरक्षाप्राप्त के रक्षा एवं विदेशी संबंधों के मामलों पर पूरा नियंत्रण रखते थे. उसकी जमीन पर शक्तिशाली सेना रखते थे एवं जब भी जी चाहे, उसे 'अयोग्य' घोषित कर उसका शासन समाप्त कर उसके क्षेत्र को हड़प सकते थे.
3. सहायक संधि प्रणाली (Subsidiary Alliance System) का अँगरेजों के लिए एक महत्वपूर्ण लाभ यह था कि इस प्रणाली द्वारा तत्कालीन फ्रांसीसी चालों को पूर्णतः विफल करने में वे समर्थ हो पाए. इस संधि की शर्तों के अनुसार कोई भी संबंधित राज्य बगैरकंपनी की अनुमति के किसी यूरोपीय नागरिक को सेवा में नहीं रख सकता था.
4. भारतीय राज्यों के आपसी विवादों का मध्यस्थता अब कंपनी द्वारा किया जाने लगा, क्योंकि राज्यों के विदेशी संबंध कंपनी के अधीन थे.
5. सहायक संधि प्रथा के द्वारा कंपनी का साम्राज्य विस्तृत हो गया. इस संधि से कंपनी को बहुत सारे पूर्ण प्रभुसत्तायुक्त प्रदेश प्राप्त हुए.




इस प्रकार, सहायक संधि प्रणाली (Subsidiary Alliance System) का व्यापक असर हुआ. इससे अनेक देशी राज्य सहायक संधि के जाल में फँसते चले गए और अन्तत: इन सारे प्रदेशों का विलय अँगरेजी राज्य में हो गया. यद्यपि कुछ राज्य अभी भी स्वतंत्र थे जिन्हें आने वाले समय में युद्ध की नीति एवं लार्ड डलहौजी (Lord Dalhousie) की 'विलय की नीति (Doctrine of lapse) के तहत् ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया.

सहायक संधि (Subsidiary Alliance) स्वीकार करने वाले राज्य

 सहायक संधि पर हस्ताक्षर करने वाला पहला भारतीय राज्य हैदराबाद था.

हैदराबाद....1798 
मैसूर......1799
तंजौर.....अक्टूबर 1799
अवध......1801
पेशवा.....दिसम्बर 1801
रार एवं भोंसले......दिसम्बर 1803
सिंधिया......1804
सहायक संधि करने वाले अन्य राज्य थे....
जोधपुर
जयपुर
मच्छेड़ी
बूँदी
भरतपुर

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