Language Translator, Compiler, Assembler aur Interpreter क्या है In Hindi


आज हम मुख्य रूप से लैंग्वेज ट्रान्स्लेटर सौफ्टवेयर और इसके प्रकार ( Language Translator Software and its Type In Hindi  ), असेम्ब्लर ( Assembler ), कम्पाइलर ( Compiler ), इंटरप्रेटर ( Interpreter ) और Compiler तथा Interpreter में अन्तर ( Difference between Compiler and Interpretar ) के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे ।
कंप्यूटर में Compiler, Assembler और Interpreter क्या होता है ?


यहां जो जानकारी आज हम लेने वाले हैं वो इस प्रकार हैं :-
Language Translator Software क्या है ? यह कितने प्रकार का होता है ?

• सोर्स प्रोग्राम या सोर्स कोड ( Source Program / Source Code ) और ऑब्जेक्ट प्रोग्राम या मशीन कोड ( Object Program Or Machine कोड ) क्या है ?

• Assembler क्या है ?

• Compiler क्या है ?

• Interpreater क्या है ?

• Compiler और Interpreater में क्या अन्तर है ?

तो आइए, क्रमबद्ध रूप से Computer से Related इन Terms पर नजर डालते हैं ।

लैंग्वेज ट्रान्स्लेटर सॉफ़्टवेयर क्या है ?

What is Language Translator Software?


दरअसल Software को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है :
1 System Software
2 Application Software
3 Utility Software
जिस प्रकार Software का तीन भागों में विभाजन किया गया है, उसी प्रकार हम System Software को भी मुख्य रूप से दो भागों में बांट सकते हैं -
1) Operating System Software
2) Language Translator Software
तो इस प्रकार यह स्पष्ट है कि Language Translator Software एक प्रकार का System Software ही है । यदि आप Software क्या होता है और यह कितने प्रकार का होता है- के विषय में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो नीचे लिंक पर क्लिक कर जानकारी प्राप्त कर लें; ताकि बेसिक clear हो जाए ।


Software क्या होता है ? Software कितने प्रकार का होता है ?

लैंग्वेज ट्रान्स्लेटर सोफ्टवेयर ( Language Translator Software ) - कंप्यूटर एक Electronic युक्ति है । यह एक मशीन है जो केवल बाइनरी अंकों को ही पढ़ सकता है अर्थात समझ सकता है । जब कोई निर्देश अथवा सॉफ़्टवेयर प्रोग्राम बाइनरी अंकों में होता है, तो इसे Machine Language यानि मशीन भाषा कहते हैं । कंप्यूटर इस भाषा को समझ जाता है और तदनुरूप उसे Run करता है । इस प्रकार, इस मशीन भाषा में दिए गए command को कंप्यूटर analyse करता है और फिर आवश्यकतानुसार परिणाम ( Output ) देता है ।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि मशीन भाषा में किसी प्रोग्राम को तैयार करना एक कठिन कार्य है । इसके साथ ही प्रत्येक Computer Processor की अपनी यानि स्वयं की एक मशीन भाषा होती है । यह मशीन भाषा उस कंपनी पर निर्भर करती है जो इस processor को बनाता है । इस प्रकार की कठिनाइयों से बचने हेतु Software Program उच्च स्तरीय भाषा ( High level language) में तैयार किये जाते हैं और Language Translator Software का प्रयोग कर इसे मशीन भाषा में Convert कर दिया जाता है ।

High level language यानि उच्च स्तरीय भाषा एक प्रकार की आम बोलचाल की भाषा होती है । इस भाषा में प्रोग्राम तैयार करना मशीन भाषा की तुलना में काफी आसान होता है । इस उच्च स्तरीय भाषा की विशेषता यह है कि यह भाषा किसी कंपनी और उसके द्वारा बनए गए मॉडल पर निर्भर नहीं करती ।

सोर्स प्रोग्राम ( Source Program ) या सोर्स कोड ( Source Code ) : high level language यानि उच्च स्तरीय भाषा में तैयार किया गया प्रोग्राम Source Program कहलाता है ।

ऑब्जेक्ट प्रोग्राम ( Object Program या Machine Code) : जब Translator Software किसी उच्च स्तरीय भाषा को मशीन भाषा में Convert कर देता है, तो इसे मशीन कोड या Object Program कहते हैं ।


लैंग्वेज ट्रान्स्लेटर सॉफ़्टवेयर के प्रकार


( Types of Language Translator Software)




LTS तीन तरह के होते हैं :-
●ASSEMBLER ( असेम्ब्लर )
●COMPILER  और
●INTERPRETER ( इंटरप्रेटर )

असेम्ब्लर ( ASSEMBLER )क्या है ?

( WHAT IS ASSEMBLER IN COMPUTER )

ASSEMBLER एक software प्रोग्राम है । Assembler Low level language ( LLL ) को मशीन भाषा में बदल देता है । इस प्रकार, असेम्ब्लर इस मशीन भाषा में बदले गए कोड को Assemble अर्थात् एक जगह एकत्र करता है और उसे Computer की Memory में स्थापित कर प्रोग्राम को run करने के लिए तैयार करता है । Computer बनाने वाली कंपनियाँ द्वारा Assembler Software उपलब्ध कराया जाता है जो कंप्यूटर processor के प्रकार और Hardware पर निर्भर करता है । इसलिए प्रत्येक processor के लिए Assembler प्रोग्राम भिन्न-भिन्न हो सकते हैं ।
[ SOURCE CODE  ➡️ Assembler Software ➡️ MACHINE CODE ]

NOTE : प्रोग्राम यानि SOFTWARE एक प्रकार का निर्देश है या निर्देशों का समूह है जो कंप्यूटर सिस्टम के कार्यों को नियन्त्रित करता है । यह निर्देश कंप्यूटर को यह बतलाता है कि उसे क्या करना है और क्या नहीं करना है ।
वह भाषा जिसे कंप्यूटर बिना LTS प्रोग्राम के समझ पाती है उसे मशीन भाषा कहते हैं । LTS का मुख्य कार्य यही है कि यह HLL को Machine Code में Convert कर देता है ताकि कंप्यूटर इसे समझ सके और तदनुरूप Output दे सके ।


कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर और compiler, Assembler व interpretar क्या है ?





Compiler क्या है और कंप्यूटर में इसके क्या कार्य हैं ?

What is Compiler in Computer and its function



COMPILER ( कम्पाइलर ) :-


जैसा कि आपने जाना कि LTS यानि भाषा अनुवादक software तीन तरह के होते हैं - Assembler, Compiler और Interpreter । आपने यह भी जाना कि भाषा अनुवादक सॉफ़्टवेयर System Software का एकप्रकार है । तो इस तरह हम Assembler, Compiler और Interpreter को System Software का भाग कह सकते हैं । Compiler
एक लैंग्वेज ट्रान्स्लेटर सॉफ़्टवेयर है । नाम से ही स्पष्ट है कि Language translator का अर्थ है भाषा अनुवादक अर्थात् एक भाषा से दूसरे भाषा में Convert करने वाला सॉफ़्टवेयर । जिस प्रकार Assembler LLT को मशीन भाषा में बदलने का काम करता है, उसी प्रकार Compiler HLL को मशीन भाषा में बदलता है ।

Computer में Compiler के कार्य :- Compile का अर्थ है संकलित करना । तो Compiler एक संकलित करने वाला सॉफ़्टवेयर है । हर HLL के लिए अलग Compiler सॉफ़्टवेयर होता है । Compiler सारे Program को एक बार में Translate कर लेता है और प्रोग्राम की अशुद्धि को एक विशेष क्रम में संसूचित कर देता है । इस प्रकार अशुद्धियों के संशोधन के उपरान्त प्रोग्राम का सम्पादन हो जाता है । प्रोग्राम के सम्पादन हो जाने से सोर्स प्रोग्राम की आवश्यकता नहीं रहती

Compiler ( कंपाइलर ) प्रोग्राम को मशीन कोड में बदलने के पश्चात उसे बखूबी memory में भी store करता है , यद्यपि यह किसी प्रोग्राम को run नहीं करता । एक बार Compiler द्वारा जब किसी प्रोग्राम को compile कर लिया जाता है तो ऐसे प्रोग्राम को चलाने के लिए किसी Compiler की कोई आवश्यकता नहीं होती ।

इंटरप्रेटर क्या है ? इंटरप्रेटर का Computer में क्या कार्य है ?

दोनों में क्या अन्तर है ?


What is Interpreter ? Difference between Compiler and Interpreter in Hindi

Interpreter

का भी यही कार्य है कि यह HLL यानि high level language को Object प्रोग्राम में बदलता है । Compiler और Interpreater के बीच समानता की अगर बात करें, तो दोनों ही सिस्टम सॉफ़्टवेयर अथवा Language Translator के भाग हैं । Compiler और Interpreter दोनों ही HLL को Object प्रोग्राम में Convert करता है । लेकिन इनके कार्य करने के ढंग में कुछ आधारभूत और महत्वपूर्ण अन्तर भी है । यद्यपि दोनों Source कोड को ऑब्जेक्ट कोड में परिवर्तित करता है, लेकिन जहां Interpreter एक एक लाईन कर बारी-बारी से प्रोग्राम को translate करता है, Compiler एक ही बार में कर देता है ।

Interpreter Translate करने के क्रम में अशुद्धियों को भी चिह्नित करता है और इसके संशोधन के बाद ही आगे का काम करता है । Compiler एक साथ ही गलतियों को चिह्नित कर उसे बताता है ।


Interpreter अशुद्धियों के संशोधन में तीव्र होता है, जबकि Compiler की गति धीमी होती है ।


Compile हो जाने के बाद Compiler की आवश्यकता नहीं होती, जबकि प्रोग्राम को चलाने हेतु हर बार Interpreter की जरुरत होती है ।


कुल मिलाकर, जिस तरह Software को तीन भागों में विभाजित किया गया है, उसी प्रकार Compiler, Assembler और Interpreter भी System Software के भाग हैं । ये सभी Language Translator प्रोग्राम हैं और सब HLL या LLL को ऑब्जेक्ट कोड में परिवर्तित करता है, जिससे COMPUTER को यह Machine Language समझ में आ पाती है । इन Softwares के कार्य करने के ढंग में कुछ अन्तर है और ये अपने-अपने Command के हिसाब से कार्य सम्पादित करते हैं ।

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